BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 09 सितंबर, 2006 को 09:51 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
विपक्ष का दायित्व निभाती रहेगी भाजपा

भाजपा
भाजपा अब नए नारे और नई छवि के साथ लोगों के बीच जाएगी
उत्तरांचल की राजधानी देहरादून में भारतीय जनता पार्टी के तीन दिन के विचार मंथन के बाद शीर्ष नेताओं ने यह तय किया है कि अपनी छवि को सुधारने के लिए सबसे पहले विपक्ष की ज़िम्मेदारी को ठीक से निभाना होगा.

इसके लिए पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना और प्रधानमंत्री कार्यालय में अमरीकी जासूस की तथाकथित मौजूदगी जैसे बेबुनियाद मुद्दों को छोड़कर अब आम आदमी की तकलीफ़ों और सरकार की विफ़लताओं की ओर ध्यान देगी.

इसी मक़सद से पार्टी ने इस बार कार्यकारिणी की बैठक में ऐसे मुद्दों पर ज़ोर दिया जिनका आम आदमी से सीधा संबंध है.

इनमें कमर-तोड़ महंगाई, खाद्य-सुरक्षा और क़र्ज़ के बोझ में दबे किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएँ शामिल हैं.

पार्टी इस बात को लेकर गंभीर दिखी कि वो अब एक नई छवि और नए नारे के साथ मतदाताओं के बीच जाने की तैयारी करे.

हालाँकि पार्टी ने पहले भी ऐसे मुद्दों को उठाया है लेकिन जिस तरह से इन पर कार्यकारिणी में इस बार चर्चा हुई उसकी मिसाल हाल के कुछ वर्षों में नहीं मिलती.

रफ्ता-रफ्ता पार्टी को अब ये समझ आ गया है कि मध्यावधि चुनावों का उनका सपना कम से कम निकट भविष्य में पूरा नहीं होने वाला और पार्टी को विपक्ष की भूमिका कुछ और समय तक निभानी होगी.

और जब कोई कार्य करना ही है तो क्यों न उसे ठीक से किया जाए.

नया नारा

इन तीन दिनों के शिविर में पार्टी ने एक नए नारे पर भी चिंतन किया.

भाजपा के कप्तान पहले ही यह समझ चुके थे कि राम और मंदिर के नाम पर अब वोट नहीं मिलने वाले. इस मुद्दे पर अब न तो लोग इकट्ठा होंगे और न ही वोट मिलेंगे इसलिए पार्टी कुछ समय से नए नारे की तलाश में थी.

पार्टी की चिंता थी कि नारा ऐसा हो जो पार्टी के कार्यकर्ताओं में नई चेतना जगाए और आम आदमी के दिल को भी छू जाए.

नारा राष्ट्रवाद की आड़ में पार्टी की हिन्दुत्वादी छवि को बनाए रखे लेकिन अल्पसंख्यक ख़ासकर मुसलमानों से सीधी टक्कर भी न ले.

आखिर पार्टी समझती है कि ये गठबंधन का दौर है और ऐसे में न मालूम सरकार बनाने के लिए कब किसका हाथ थामना पड़े.

वंदेमातरम पर काफ़ी हद तक सहमति थी लेकिन फिर भी नेतागण लोगों की नब्ज़ टटोलना चाहते थे.

जब सात सितंबर को पार्टी को यह समाचार मिला कि राष्ट्रीय गीत न सिर्फ़ हिन्दू स्कूलों और संस्थानों में बल्कि मुस्लिम मदरसों में भी उसी जोश और उमंग के साथ गाया गया तो पार्टी नेताओं के मन से संशय दूर हो गया और उन्हें एक नया नारा मिल गया.

भाजपा अब गली-गली, गाँव-गाँव वंदेमातरम की अलख जगाएगी और अबकी बार राम नहीं भारत माता के नाम पर वोट भुनाएगी.

इससे जुड़ी ख़बरें
देहरादून में आगे की राह तलाशती भाजपा
07 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
पोटा दोबारा लागू हो-आडवाणी
25 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस
खुराना ने भाजपा से इस्तीफ़ा दिया
20 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>