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शुक्रवार, 08 सितंबर, 2006 को 17:47 GMT तक के समाचार
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झरिया खदान में सभी मज़दूरों की मौत

खदान
खदान से लाशें निकालने का काम जारी है
झारखंड में झरिया की नगदा कोलियरी में धमाके के बाद अधिकारियों का कहना है कि इस धमाके में खान के अंदर मौजूद सभी 54 मज़दूर मारे गए हैं.

धनबाद ज़िले की उपायुक्त बीला राजेश ने कहा,"उस खदान में अब कोई ज़िंदा नहीं है. मारे गए खान मज़दूरों की लाश निकालने का काम चल रहा है."

खान के अंदर गए कर्मचारियों ने अब तक कुल 46 लाशों की गिनती की है और उन्हें एक-एक करके खान की गहराई से बाहर निकालने का काम चल रहा है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस दुर्घटना पर अफ़सोस और मृतकों के परिजनों के प्रति सहानुभूति प्रकट की है.

खान के बाहर मज़दूर के परिवार वालों, स्थानीय लोगों और पत्रकारों की भीड़ जमा है और वहाँ का माहौल दिल को दहला देने वाला है.

खान सुरक्षा अधिकारी नारायण तिवारी का कहना है कि लाशों की पहचान के काम में काफ़ी मुश्किलें आ रही हैं क्योंकि ज़्यादातर लाशें बुरी तरह झुलस गई हैं.

मारे गए मज़दूरों की पहचान उनके बिल्ले के नंबरों के हिसाब से करने की कोशिश की जा रही है लेकिन कई बिल्ले भी धमाके की वजह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं या मलबे में दबे हुए हैं.

रोष

प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ़ लोगों में काफ़ी गु़स्सा है, गुरूवार की रात को नगदा खान के बाहर काफ़ी हंगामा हुआ और लोग पुलिस की घेराबंदी को तोड़कर खान में घुस गए और उन्होंने खुद ही एक लाश बाहर निकाल ली.

शिबू सोरेन
कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने घटनास्थल पर मुआवज़े की घोषणा की

लोगों का ग़ुस्सा इतना भड़क गया था पुलिस ख़ुद को असहाय महसूस कर रही थी और ऐसा लग रहा था कि इन लोगों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ सकता है.

इसके बाद अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच एक बैठक हुई, लोगों को समझाया-बुझाया गया और मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को तुरंत नौकरी देने की बात कही गई तब जाकर लोग कुछ शांत हुए.

इससे पहले कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने मारे गए मज़दूरों के परिवारवालों को तीन-तीन लाख रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की थी.

मज़दूर संगठनों के नेताओं का कहना है कि यह एक असुरक्षित खान थी लेकिन अधिकारियों ने सुरक्षा इंतज़ामों की अनदेखी की.

इससे पहले अगस्त महीने के पहले सप्ताह में भी एक खान दुर्घटना हुई थी जिसमें एक खान में पानी भर जाने की वजह से बड़ी संख्या में मज़दूरों की मौत हो गई थी.

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