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रविवार, 27 अगस्त, 2006 को 09:47 GMT तक के समाचार
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'हथियारों की निगरानी को लेकर अस्पष्टता'
माओवादी
माओवादियों ने इस वर्ष संघर्षविराम की घोषणा की थी
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी इयन मार्टिन ने कहा है कि कुछ समस्याओं के चलते वे हथियारों की निगरानी और सैन्य कर्मचारियों के प्रबंधन का कामकाज तुरंत शुरू नहीं कर सकते.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान के विशेष दूत इयन मार्टिन का कहना है कि नेपाल में सत्ताधारी पार्टियों और माओवादियों को हथियारों के प्रबंधन के मुद्दे परर पहले आपस में सहमत होना पड़ेगा.

बीबीसी के साथ साक्षात्कार में इयन मार्टिन ने कहा कि हथियारों और सैन्य कर्मचारियों के प्रबंधन को लेकर जो सहमति हुई है वो स्पष्ट नहीं है.

उनका कहना था कि कितने इलाक़ों को छावनी के तौर पर इस्तेमाल करना है और कितने माओवादियों को उनमें रखना है, इस बारे में सहमति में ज़िक्र नहीं किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने कहा कि जब तक दोनों पक्ष पूरी प्रकिया के नियम क़ायदे स्पष्ट नहीं करते, वे निगरानी का काम नहीं कर सकते.

इयन मार्टिन ने ये बयान नेपाल में कोफ़ी अन्नान का विशेष दूत बनाए जाने के एक दिन बाद दिया है.

सहमति

हथियारों की निगरानी को लेकर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर पहले नेपाल सरकार और माओवादियों के बीच मतभेद थे.

लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने कोफ़ी संयुक्त राष्ट्र महासचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि हथियारों के प्रबंधन के लिए संयुक्त राष्ट्र अधिकारी नियुक्त किए जाएँ.

दोनों पक्षों द्वारा लिखे पत्रों में कहा गया था कि माओवादियों को छावनियों तक सीमित रखा जाएगा जबकि नेपाली सेना बैरकों में रहेगी.

साथ ही लिखा गया था कि इस प्रकिया को लागू करने को लेकर बाकी बातें विस्तार से बाद में तय की जाएँगी.

नेपाल में हथियारों के प्रबंधन का मामला काफ़ी अहम है क्योंकि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे को सुलझाए बिना अंतरिम सरकार में माओवादी शामिल नहीं हो सकते.

और जब तक ऐसी सरकार नहीं बनती, नेपाल की संविधान सभा के लिए चुनाव नहीं हो सकते.

इस साल अप्रैल में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर जनआंदोलन चला था और उन्हें सत्ता पर अपनी सीधी पकड़ छोड़नी पड़ी थी.

नेपाली पार्टियों और माओवादियों के बीच उस समय समझौता हुआ था कि संविधान सभा के लिए चुनाव करवाए जाएँगे.

राजा ज्ञानेंद्र के संसद को बहाल करने और सत्ता जनता को सौंपने की घोषणा के बाद माओवादी विद्रोहियों ने संघर्षविराम की घोषणा कर दी थी.

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