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'मुलायम सरकार के ख़िलाफ़ षड्यंत्र' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दादरी में एक बड़ी परियोजना का शिलान्यास किया था. इस परियोजना के लिए भूमि के अधिग्रहण पर सवाल उठाए जा रहे हैं. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि किसी भी प्रदेश के लिए उद्योग और किसान दोनों महत्वपूर्ण हैं. भूमि अधिग्रहण का काम केवल उत्तर प्रदेश की सरकार कर रही हो, ऐसा नहीं है. सभी राज्य सरकारें ऐसा कर रही हैं,चाहे वह उत्तर प्रदेश हो, हरियाणा या फिर पश्चिम बंगाल. सभी जगह मुआवज़े का भुगतान किया जा रहा है. लेकिन जानबूझकर उत्तर प्रदेश सरकार को संकट में डाला जा रहा है. दरअसल कुछ ताकतें हैं जो मुलायम सरकार के ख़िलाफ़ षड्यंत्र रच रही हैं. दादरी में तो राज्य सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सरकार काम कर रही थी. मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि प्रदेश के लिए जितने उद्योग महत्वपूर्ण हैं उतने ही किसान भी हैं. लेकिन सवाल इससे बड़ा है, यह दादरी के एक ज़मीन के टुकड़े तक सीमित नहीं है. भारत के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार व्यवस्था में धकेल दिया गया है जबकि कृषि आज भी इंद्र देवता के भरोसे है. जवाहरलाल नेहरू ने जो पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू कीं थीं, उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है. हमारी माँग है कि किसानों की दुर्दशा पर व्यापक बहस होनी चाहिए. इसमें दो राय नहीं हो सकती कि उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी है और इसको दूर करने के लिए बिजली परियोजना स्थापित की जानी चाहिए. लेकिन मेरा सवाल है और मैं जानना चाहता हूँ कि बिजली की कमी को दूर करने के लिए इसके अलावा विकल्प ही क्या है. (आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें वीपी किसानों के लिए गिरफ़्तार हुए17 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में बढ़ता राजनीतिक टकराव16 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस वीपी ने फिर बनाया जनमोर्चा23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस चुनाव से पहले की क़वायद शुरू12 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस अहम है तीसरे मोर्चे की भूमिका01 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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