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शनिवार, 19 अगस्त, 2006 को 13:03 GMT तक के समाचार
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ठंडे को लेकर गर्म हुए धर्मगुरू

कोला
सीएसई का कहना है कि शीतल पेयों में हानिकारक तत्वों की मात्रा पहले से भी बढ़ गई है
शीतल पेयों में कीटनाशकों की कथित मौजूदगी को लेकर जारी विवाद में अब धर्मगुरु भी कूद पड़े हैं.

कुछ राज्यों ने तो इन शीतल पेयों की बिक्री पर पहले ही रोक लगा दी है, अब जैन संप्रदाय के धार्मिक गुरु इसके पीने को धर्मविरुद्ध बता रहे हैं.

बाबा रामदेव सहित कई हिंदू आध्यात्मिक गुरु पहले से ही शीतल पेयों का विरोध करते रहे हैं.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक धार्मिक कार्यक्रम में जैन मुनि आचार्य विनय सागर महाराज ने कहा कि शीतल पेयों में में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जिनका इस्तेमाल जैन धर्म की मान्यताओं के खि़लाफ़ है इसलिए जैनियों को इनका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘‘दूध-दही के देश में कोक-पेप्सी नहीं चलेगा.’’

जैन मुनि का दावा है कि इन शीतल पेयों कुछ ऐसे तत्व होते हैं जिनका स्रोत जानवर हैं और जैन धर्म में माँसाहार पूरी तरह वर्जित है.

लेकिन कोका कोला की वेबसाइट पर दी गई जानकारी में कहा गया है, "हमारे शीतल पेयों में किसी जानवर या पक्षी से निकले गए तत्वों का प्रयोग नहीं किया जाता है और हम जिस देश में अपने उत्पाद बेचते हैं उस देश के क़ानूनों का पूरा सम्मान करते हैं."

प्रतिबंध की माँग

जैन मुनि ने धार्मिक कारणों के अलावा स्वास्थ्य, पर्यावरण और नैतिक मुद्दों का हवाला देकर भी इन पेयों पर भारत में प्रतिबंध लगाने की माँग की.

 दूध-दही के देश में कोक-पेप्सी नहीं चलेगा
जैन मुनि विनय सागर महाराज

जैन मुनि विनय सागर महाराज बोतलबंद पानी की बिक्री के भी ख़िलाफ़ हैं. उन्होंने कहा, ‘‘पानी मनुष्य की मूल आवश्यकता है और उसे बेचना पूरी तरह अनैतिक है इसलिए दूसरे धर्मगुरु भी इसका विरोध करें.’’

आचार्य विनय सागर पहले भी विदेशी कंपनियों का विरोध करने वाली संस्थाओं से जुडे़ रहे हैं और जरूरत पड़ने पर इस बार भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं.

शीतल पेयों के व्यापार से जुडे़ कुछ लोगों का कहना है कि हाल में कीटनाशकों की मौजूदगी को लेकर उठे विवाद के बाद अब धर्मगुरूओं के विरोध से बिक्री पर बुरा असर पड़ सकता है.

जैन संप्रदाय के व्यवसायी राजेंद्र कोठारी कहते हैं, ‘‘हमारे संप्रदाय के बुजुर्ग लोग धार्मिक मान्यताओं के चलते वैसे भी इन पेयों को नहीं पीते लेकिन खान-पान के व्यवहार तेजी से बदल रहे हैं.’’

वे कहते हैं, ‘‘मेरी माँ और पत्नी कोक-पेप्सी नहीं पीतीं लेकिन मेरी बेटी को इसके बिना चैन नहीं मिलता.’’

बहरहाल, शीतल पेय बनाने वाली कंपनियाँ धार्मिक गुरूओं की ऐसी अपीलों से परेशान हुए बिना नहीं रह सकतीं.

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