|
नटवर के निशाने पर थीं सोनिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के ‘तेल के बदले अनाज’ कार्यक्रम विवाद में घिरे पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर तीख़ा प्रहार करने के लिए तैयार थे. राज्य सभा के अध्यक्ष के कार्यालय को सौंपे गए अपने 'बयान' के मूल मसौदे में उन्होंने भारत के स्वतंत्र नीति को छोड़ अमरीकी विदेश नीति का ‘ग़ुलाम’ बनने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को ज़िम्मेदार ठहराया था. बीबीसी के पास इस मूल मसौदे की प्रति है और ये शुक्रवार को उनकी प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले लिखा गया है. प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने कहा था कि वे सोनिया गाँधी की कभी आलोचना नहीं करेंगे. इस तरह सार्वजनिक तौर पर नटवर सिंह ने केवल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ही आलोचना की है. लेकिन उनके 'बयान' के मूल मसौदे से पता चलता है कि अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार सीधे सोनिया गाँधी पर प्रहार करने के लिए तैयार हो रहे थे. 'सोनिया सब जानती हैं' अपने लिखित 'बयान' में उनका कहना है कि उनकी बग़दाद यात्रा के दौरान 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम के बारे में उनकी कोई चर्चा नहीं हुई और वापस आने पर उन्होंने सोनिया गाँधी को पूरी तरह अपनी यात्रा के बारे में बताया था. मूल मसौदे में उनका कहना है, “वे (सोनिया गाँधी) हर बात जानती हैं. उनकी जानकारी और अनुमति के बिना कांग्रेस रूपी वृक्ष में एक पत्ता भी नहीं हिलता.” उनका कहना है कि वे कांग्रेस के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के नेता के रूप में जनवरी 2001 में बग़दाद गए थे. उनका कहना है, "श्रीमती गाँधी ने मुझे राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के लिए एक परिचय का पत्र दिया था...जिसे मैने बग़दाद पहुँचने पर (तब इराक़ के) उप प्रधानमंत्री तारीक़ अज़ीज़ को दे दिया." मूल मसौदे के मुताबिक, "बग़दाद में रहते समय किसी भी इराक़ी प्राधिकरण के साथ तेल के बदले अनाज कार्यक्रम, तेल के ठेकों, बैंक खातों इत्यादी पर मेरी चर्चा नहीं हुई." अपने 'बयान' के मूल मसौदे में नटवर सिंह संयुक्त राष्ट्र की जाँच समिति के अध्यक्ष पॉल वॉल्कर के इरादों और रिपोर्ट बनाने के ढंग पर भी सवाल उठाते हैं. उनका कहना है, "श्री पॉल वॉल्कर के कई अमरीकी सरकारों के साथ रिश्ते छिपे नहीं हुए. उन्होंने मेरा और कांग्रेस पार्टी का नाम रिपोर्ट के संलग्न दस्तावेज़ों में किया. लेकिन हमारे नाम रिपोर्ट में शामिल करने का कोई सबूत नहीं पेश किया गया." उनका कहना है कि इसीलिए ये हैरानी की बाद नहीं कि दुनिया में भारत के अलावा किसी देश ने इस रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया. भारत, एक ऐसा देश जो अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर गर्व करता था." पत्र के मूल मसौदे से संकेत मिलता है कि नटवर सिंह ने पहले अपने चर्चित अमरीका विरोधी झुकाव के आधार पर प्रहार करने का फ़ैसला किया था. अपने बयान के पहले मसौदे में वे कहते हैं, "मैं पूरी तरह अमेरीका के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के पक्ष में हूँ लेकिन अमरीका की ‘आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई’ इस्लामिक जगत के ख़िलाफ़ लड़ाई बन गई है. जो इराक़ और लेबनान में हो रहा है...उससे मुसलमानों के दिलों को चोट पहुँची है." 'बलि क्यों चढ़ाई?' पाठक समिति की रिपोर्ट के लीक होने पर ये कहने के लिए तैयार थे, "यदि प्रधानमंत्री के कार्यालय से ऐसी लीक होने लगे तो क्या गारंटी है कि हमारे परमाणु रहस्य और सुरक्षा संबंधित जानकारी भी लीक नहीं होगी. " अपने 'बयान' के मूल मसौदे पर वे पूछते हैं, "मेरी बलि क्यों चढ़ाई गई?" जब से कांग्रेस पार्टी की वर्ष 2004 के आम चुनवों में आश्चर्यजनक जीत हुई है तब से किसी की भी पार्टी की नेता सोनिया गाँधी से किसी मुद्दे पर सवाल पूछने की हिम्मत नहीं हुई है. इस तरह हाल के वर्षों में नटवर सिंह पार्टी के अंदर तक पहुँचे हुए पहले ऐसे व्यक्ति बनने के लिए तैयार हो रहे थे जो सोनिया गाँधी को निशाना बनाने के लिए तैयार थे. लेकिन राज्य सभा के अध्यक्ष के कार्यालय को भेजे गए अंतिम मसौदे में अधिकांश जगह सोनिया गाँधी पर किया गए प्रहार को निकाल दिया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि राज्य सभा सार्वजनिक किए जाने वाले मसौदे में कम आलोचना वाली टिप्पणियाँ भी हटा दी जाएँगी. शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नटवर सिंह ने सोनिया गाँधी की बढ़-चढ़ कर प्रशंसा की लेकिन मूल मसौदा से पता चलता है कि सार्वजनिक तौर पर अपनी वफ़ादारी दिखाने के बावजूद नटवर सिंह कांग्रेस से उनकी ओर हुए बर्ताव और सोनिया गाँधी के पार्टी की कई गतिविधियों को चलाने के ढंग पर किस तरह अंदर से गुस्सा थे. |
इससे जुड़ी ख़बरें कांग्रेस ने नटवर सिंह को निलंबित किया08 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस पूर्व मंत्रियों वाले विवाद ‘वॉर्म अप’ मैच हैं08 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस इराक़, वोल्कर और नटवर सिंह08 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस विपक्ष ने लोक सभा का बहिष्कार किया08 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस अख़बारों में छाए नटवर सिंह09 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नटवर ने इस्तीफ़ा न देने की बात दोहराई04 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस कांग्रेस ने नटवर से एक और पद छीना05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस दबाव में टूटे नटवर, त्यागपत्र दिया06 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||