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दबाव में टूटे नटवर, त्यागपत्र दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वोल्कर समिति की रिपोर्ट में नाम आने के बाद से दबाव में घिरे भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया है. नटवर सिंह ने मंगलवार रात को दिल्ली में अपने घर के बाहर पत्रकारों के सामने अपने त्यागपत्र की घोषणा की. उन्होंने बताया कि त्यागपत्र का फ़ैसला उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उन्हें कारण बनाकर विपक्ष संसद की कार्यवाही में हंगामा पैदा करे. उल्लेखनीय है कि नटवर सिंह ने एक दिन पहले रूस की यात्रा कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से फ़ोन पर बात कर कहा था कि वे प्रधानमंत्री के देश लौटते ही त्यागपत्र दे देंगे. लेकिन इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने लगातार चौथे दिन संसद में काम नहीं होने दिया जिसके बाद प्रधानमंत्री के भारत लौटने से पहले ही नटवर सिंह ने इस्तीफ़ा दे दिया. हालाँकि प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने नटवर सिंह के इस्तीफ़े को अपर्याप्त बताते हुए संसद में नए सिरे से बहस कराए जाने की माँग की है. 'निर्दोष' नटवर सिंह ने इस्तीफ़ा देने की घोषणा करने के साथ ही अपने आपको निर्दोष भी बताया. उन्होंने कहा,"मैं फिर ये कहना चाहता हूँ कि मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ और मेरे ख़िलाफ़ कोई आरोप दर्ज़ नहीं किया गया है". लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपा है कि नहीं. उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही नटवर सिंह के इस्तीफ़ा देने के फ़ैसले की सूचना आ गई थी जिसकी सूचना सोमवार रात कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने दी. कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया था कि नटवर सिंह ने रूस की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से फ़ोन पर बात की और कहा कि उनके देश लौटने पर वे मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे देंगे. मामला पिछले कुछ दिनों से नटवर सिंह पर इस्तीफ़े के लिए दबाव बना हुआ था. मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने लगातार चौथे दिन दोनों सदनों में कार्यवाही नहीं चलने दी.
वहीं संसद में विपक्ष के हंगामे से अलग स्वयं अपनी पार्टी में भी नटवर सिंह अलग-थलग पड़ते दिखे. कांग्रेस पार्टी ने रविवार देर रात नटवर सिंह को पार्टी की संचालन समिति से हटा दिया. कांग्रेस संचालन समिति अभी पार्टी में निर्णय लेनेवाली सर्वोच्च संस्था है. सोनिया गांधी ने तीसरी बार पार्टी का अध्यक्ष चुने जाने के बाद पार्टी कार्यसमिति को संचालन समिति में बदल दिया था. उल्लेखनीय है कि इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम में घोटाले की जाँच करनेवाली वोल्कर समिति ने अपनी रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम लिए हैं उनमें नटवर सिंह का भी नाम शामिल था. इस मामले ने जल्दी ही तूल पकड़ लिया जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस बारे में जाँच कराने की घोषणा की और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एस पाठक को इसकी ज़िम्मेदारी सौंप दी. इसके बाद नटवर सिंह से विदेश मंत्रालय तो वापस ले लिया गया लेकिन तब प्रधानमंत्री कार्यालय से एक बयान जारी कर ये कहा गया था कि नटवर सिंह के पद छोड़ने की पेशकश के बावजूद मनमोहन सिंह ने उनसे मंत्रिमंडल में बने रहने का अनुरोध किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें त्यागपत्र के लिए तैयार हुए नटवर05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस कांग्रेस ने नटवर से एक और पद छीना05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस अकेले पड़ते जा रहे हैं नटवर05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नटवर ने इस्तीफ़ा न देने की बात दोहराई04 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'नटवर ख़ुद इस्तीफ़ा दें, तो विचार हो सकता है'04 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मामले की तह तक जाएँगे: प्रधानमंत्री 08 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वोल्कर मामले की न्यायिक जाँच घोषित07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नटवर पर गिरी गाज, विदेश मंत्रालय छिना07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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