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सोमवार, 07 अगस्त, 2006 को 23:05 GMT तक के समाचार
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मुंबई में बारिश से जनजीवन बेहाल

बारिश
मुंबई में भारी बारिश ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है
मुंबई में शनिवार से एक बार फिर ज़बर्दस्त बारिश हो रही है और कई स्थानों पर पानी भर गया है.

कई लोगों का कहना है कि इस बारिश ने एक बार फिर से पिछले साल 26 जुलाई की याद दिला दी है.

कल्याण के वालधुनी इलाके में नीचे की जमीन पर बसे करीब 300 लोगों के घरों में पानी घुस गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए दर-बदर भटकते नज़र आए.

लोगों ने अपना सामान छोडकर अपनी जान बचाने में ही समझदारी समझी. कई लोगों को टूटकर बिलखते देखा गया तो कईयों को समय रहते समझ आने पर अपनी जान बच जाने का भगवान को शुक्रिया अदा करते देखा गया.

 अब तो बस यही लगता है कि किसी तरह जान बचानी है. जब से बरसात शुरू हुई है ठीक से नींद भी नहीं आती हैं
भगवान दत्त पांडे, मुंबई निवासी

उज्जवला बताती हैं, “जब धीरे-धीरे पानी ऊपर आने लगा तो मैंने पति और अपने तीन बच्चों के साथ वहां से भाग जाने में ही भलाई समझी और पिछले दो दिनों से हम यहां वहां रहकर समय निकाल रहे हैं.”

राम दयाल प्रसाद के घर में सात लोग रहते हैं. रविवार होने की वजह से सब घर पर ही थे. वो कहते हैं “पानी बढते देख ऐसा लगा सामान गया तो गया उसकी परवाह नहीं लेकिन मेरा परिवार सलामत रहा तो ये सब फिर आ जाएगा”.

भगवान दत्त पांडे रूंआसे से कहने लगे, “पता नहीं क्या होगा, क्या चाहते हैं भगवान. अब तो बस यही लगता है कि किसी तरह जान बचानी है. जब से बरसात शुरू हुई है ठीक से नींद भी नहीं आती हैं”.

उज्जवला मोरे
उज्जवला मोरे का परिवार दो दिनों से सड़क पर है
उज्जवला और सुरेश मोरे पिछले दो दिनों से अपने घर से बाहर हैं.

अपने दोनों बच्चों को चिपकाए सुशीला देवी बताती हैं, “ऐसा नहीं लग रहा था कि पिछले साल जैसा ऐसा कुछ होगा. लेकिन पानी जब बढने लगा तो हमनें कुछ सामान लिया और भगवान का नाम लेकर वहां से निकल पडे”.

तीन साल के राजा को शायद इस बात का आभास तक नहीं है. अपनी मां की गोद से उछलकूद करते देख राजा की मां की आंखों से सहज ही आंसू आ गए.

लेकिन मुंबई में मुसीबत के समय मुंबईकरों के हौसले बुलंद होते कई बार देखा गया है और इस बार वही मिला.

इस वक़्त भी आस पास के लोगों के साथ ही इलाके के नगरसेवक बाला म्हात्रे ने खाने के साथ-साथ रहने का भी इंतजाम किया.

अपने कई सहयोगियों के साथ मिलकर आज भी ये बेघर हुए लोगों के लिए खाने के इंतजाम में जुटे हैं.

बाला म्हात्रे कहते हैं, “ये तो हर साल का हो गया है. अब तो इसकी आदत सी पड गई है”.

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