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गुरुवार, 27 जुलाई, 2006 को 00:24 GMT तक के समाचार
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परमाणु समझौते पर ज़ोरदार बहस
मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे
इस समझौते को भारत-अमरीका रिश्तों में राष्ट्रपति बुश की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है
अमरीकी संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा में भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते पर बहस हो रही है. इसके तहत अमरीका भारत को असैनिक मकसदों के लिए परमाणु ईंधन और तकनीक दे पाएगा.

दूसरी ओर भारत इस समझौते के तहत अपने परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की इजाज़त देगा.

समाचार एजेंसियों के अनुसार प्रतिनिधि सभा में बहस के बाद, बुधवार को ही इस समझौते पर प्रतिनिधि सभा में मतदान होने की संभावना है.

 भारत ने कभी एक बार भी अपनी सीमाओं के बाहर परमाणु तकनीक का प्रसार नहीं किया है. लेकिन ये उसके कुछ पड़ोसियों के बारे में नहीं कहा जा सकता
डेमोक्रेटिक पार्टी के जो क्रौली

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश चाहते हैं कि कांग्रेस यानि अमरीकी संसद भारत को उन अमरीकी क़ानूनों से मुक्त करे जिनके तहत अमरीका परमाणु यंत्रों और सामग्री का व्यापार केवल उन देशों से कर सकता है जिन्होंने पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की स्वीकृति दी हो.

समर्थन और विरोध

समाचार एजेंसियों के अनुसार अमरीका की डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता टॉम लैंटॉस ने इस समझौते के बारे में कहा, "ये भारत और अमरीका के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव है. हम इतिहास के उस मोड़ पर हैं जब हम दोनो देश सामान्य मूल्यों और हितों के आधार पर नए संबंध कायम कर रहे हैं."

भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और इसीलिए 1974 में भारत के पहले परमाणु विस्फोट के बाद से अमरीका ने असैनिक मकसदों के लिए भी भारत को परमाणु तकनीक और ईंधन नहीं दिया है.

 ये भारत के लिए बहुत बड़ी रियायत होगी. ये अप्रसार संधी को बड़ा धक्का होगा और इससे भारत को अपने परमाणु हथियारों के भंडार का विस्तार करने का मौका मिलेगा
डेमोक्रेटिक पार्टी के एड मार्की

प्रतिनिधि सभा में बहस के दौरान एक अन्य डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य जो क्रौली का कहना था, "भारत ने कभी एक बार भी अपनी सीमाओं के बाहर परमाणु तकनीक का प्रसार नहीं किया है. लेकिन ये उसके कुछ पड़ोसियों के बारे में नहीं कहा जा सकता."

लेकिन एक अन्य डेमोक्रेटिक पार्टी सदस्य डेनिस कुसिनिक का कहना था, "हम ग़लत दिशा में जा रहे हैं. विश्व में इस संकट की घड़ी में हमें परमाणु हथियार ख़त्म करने की बात करनी चाहिए..."

समाचार एजेंसियों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी के एक सदस्य एड मार्की का कहना था, "ये भारत के लिए बहुत बड़ी रियायत होगी. ये अप्रसार संधी को बड़ा धक्का होगा और इससे भारत को अपने परमाणु हथियारों के भंडार का विस्तार करने का मौका मिलेगा."

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