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अल्फ़ा चरमपंथियों की रिहाई की सिफ़ारिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम की सरकार ने यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम यानी अल्फ़ा के पाँच अलगाववादी चरमपंथियों को रिहा करने की सिफ़ारिश की है. असम के वरिष्ठ अधिकारी एसके कबीलान ने बीबीसी को बताया कि राज्य सरकार ने यह सिफ़ारिश केंद्र सरकार को भेज दी है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सकारात्मक रुप से विचार करने का फ़ैसला किया है. हलाँकि इन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अदालत में चल रहे मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा. उन्होंने कहा, "इन चरमपंथियों को ज़मानत, पेरोल या किसी अन्य व्यवस्था के तहत रिहा किया जाएगा लेकिन उन पर लगे आरोपों को वापस नहीं लिया जाएगा." बातचीत अल्फ़ा की तरफ़ से इंदिरा गोस्वामी के नेतृत्व में पीपुल्स कंसल्टेटिव ग्रुप या पीसीजी राज्य में चरमपंथी हिंसा ख़त्म करने के लिए केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहा है. पिछले हफ़्ते ही दिल्ली में पीसीजी और केंद्र सरकार के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई है. पीसीजी के ज़रिए अल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच सीधी बातचीत शुरु करने पर सहमति बनी है. पीसीजी के सदस्य लचित बोरदोलोई ने बीबीसी को बताया कि केंद्र सरकार ने अल्फ़ा से कहा है कि वो सीधी वार्ता में शामिल होने का लिखित आश्वासन दे. कबीलान ने कहा कि ये शर्त अल्फ़ काडरों को रास नहीं आ रहा है. अल्फ़ा पिछले 25 वर्षों से पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा बलों से संघर्ष कर रहा है. इस हिंसा में हजारों लोग मारे जा चुके हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अल्फ़ा के साथ दूसरे दौर की वार्ता होगी'23 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा के साथ दूसरे दौर की चर्चा07 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'रिहा किए जा सकते हैं असम के विद्रोही'08 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हिंसक झड़पों के बाद हड़ताल का आहवान12 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस केंद्र और अल्फ़ा सीधे बातचीत करेंगे22 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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