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रविवार, 02 जुलाई, 2006 को 17:05 GMT तक के समाचार
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'महंगाई रोक पाने में विफल रही सरकार'

बाज़ार
सरकार की कृषि नीति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं
भारत में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रही वामपंथी पार्टियों का कहना है कि सरकार महंगाई रोक पाने में विफल रही है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अतुल कुमार अंजान का कहना है कि किसानों की स्थिति पर प्रधानमंत्री घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं.

दूसरी ओर भारत के कृषि राज्यमंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह ने वर्तमान कृषि नीति में और अधिक सुधार करने की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि देश के किसानों के लिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

दोनों नेता बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात, बीबीसी के साथ में श्रोताओं के सवालों का जवाब दे रहे थे.

अतुल अंजान ने विश्व व्यापार संगठन में भारत सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए.

उन्होंने कहा कि भारत डब्लूटीओ में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व सही ढंग से नहीं कर पाया है और न ही उसने ब्राज़ील जैसे देशों की स्थिति से कुछ सीख ली है.

नीतियों पर सवाल

अंजान ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "भारत ने विश्व व्यापार संगठन में अपना पक्ष और किसानों के हित की बात को रख पाने में असफल रहा और इस सम्मेलन के बहिष्कार का फ़ैसला तब लिया जब भारत के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था."

 भारत ने विश्व व्यापार संगठन में अपना पक्ष और किसानों के हित की बात को रख पाने में असफल रहा और इस सम्मेलन के बहिष्कार का फ़ैसला तब लिया जब भारत के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था
अतुल कुमार अंजान, वामपंथी नेता

हालांकि भारत सरकार के विश्व व्यापार संगठन के बहिष्कार के फ़ैसले को सही बताते हुए उन्होंने कहा कि देर से ही सही पर सरकार ने सही निर्णय लिया है.

महंगाई से निपट पाने में सरकार की नीतियों में चूक के बारे में कृषि राज्यमंत्री ने कहा, "हमें इस बार गेहूँ आयात करना पड़ रहा है. इसका कारण यह नहीं है कि उत्पादन कम हुआ है बल्कि न्यूनतम समर्थन मूल्य कम होने के कारण हम यह स्थिति पैदा हुई है."

पर वामपंथी नेता ने इस पर सरकार की नीतियों पर ही सवाल उठाया और कहा कि सरकार के कहने और करने में फ़र्क है.

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कॉर्पोरेट टैक्स और आयकर में बड़ी-बड़ी छूट दे रही है और दूसरी ओर ग़रीब किसानों का कर्ज़ तक माफ़ नहीं किया गया है. केवल उनके कर्ज़ पर ब्याज माफ़ कर दिया गया है.

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