|
महिला संबंधी बयान पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महिला संगठनों ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'सेना महिला अधिकारियों के बिना भी काम चला सकती है.' एक अख़बार ने भारत के उप सेनाध्यक्ष लेफ़्टिनेंट जनरल एस पट्टाभिरमन के हवाले से ख़बर छापी कि 'सेना में महिला अधिकारियों के साथ तालमेल का स्तर कम है और हम उनके बिना भी काम चला सकते हैं.' उप सेनाध्यक्ष का कथित बयान भारत प्रशासित कश्मीर में एक महिला अधिकारी के आत्महत्या करने के बाद उठे विवाद पर आया था. इस महिला अधिकारी ने पिछले सप्ताह आत्महत्या कर ली थी. उप सेनाध्यक्ष के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी और महिला आयोग ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. भाजपा की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने तो उन्हें बर्ख़ास्त करने की मांग कर डाली. उनका कहना था कि सरकार को उन्हें बता देना चाहिए कि 'उनके बिना भी सेना काम चला सकती है.' राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी कथित बयान की आलोचना की. आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने सोमवार को एक पत्रकारवार्ता में इसे बहुत ग़ैरज़िम्मेदाराना ठहराया. हालांकि सेना का कहना है कि अख़बार ने उप सेनाध्यक्ष के बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया. यह विवाद इतना तूल पकड़ गया कि रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी बीचबचाव करना पड़ा. उन्होंने कहा कि सरकार सेना में महिला अधिकारियों की क़द्र करती है और चाहती है कि उनकी संख्या बढ़े. लेकिन महिला संगठन इस बयान से संतुष्ट नहीं हैं. भारतीय सेना ने लगभग 14 साल पहले महिलाओं की भर्ती शुरू की थी. इस समय सेना में 930 महिला अधिकारी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सैन्य बलों के लिए ट्रिब्यूनल बनेगा29 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस कश्मीरी पंडितों की सेना में भर्ती25 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस डीज़ल चोरी मामले में सैनिकों पर कार्रवाई30 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस सेना के अफ़सर के ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल20 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस चूहों के सामने सेना मैदान में उतरी03 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||