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चूहों के सामने सेना मैदान में उतरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में चूहों के आतंक से निपटने के लिए अब सेना मैदान में उतरी है. दो राज्यों मिज़ोरम और मणिपुर में चूहों की बेतहाशा बढ़ती आबादी खेतों में लगी फ़सलों और खलिहानों में रखे भंडारों को तेज़ी से चट कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक़ ऐसा बाँसों मे फूल खिलने के कारण हो रहा है जिसे हज़म करने से चूहों की प्रजनन क्षमता में गुणात्मक बढ़ोत्तरी होती है. पूर्वोत्तर में बाँसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है और इनमें 50 वर्षों के अंतराल पर इस तरह के फूल खिलते हैं. इतिहास इससे लोगों में 60 के दशक की यादें ताज़ा हो गई है जब चूहों ने मिज़ोरम में भयंकर अकाल की स्थिति पैदा कर दी थी. उस समय मिज़ोरम एकीकृत असम प्रांत का ही हिस्सा था और स्थिति से निपटने में प्रशासनिक विफलता के बाद मिज़ो युवाओं ने हथियार उठा कर अलगाववादी संगठन मिज़ो नेशनल फ़्रंट का गठन कर लिया. बीस वर्षों तक अलगाववाद की राह पर चलने के बाद यह संगठन 1986 में राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ा और मिज़ोरम के मौजूदा मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा एमएनएफ़ के अग्रणी नेताओं में से एक थे. सेना की मुस्तैदी अभी चूहों से सबसे अधिक बर्बादी पश्चिमी और पूर्वी मिज़ोरम तथा मणिपुर के चुड़ाचांदपुर ज़िले में हो रही है जहाँ सेना ने कमान संभाल ली है. कर्नल शांतनु देव गोस्वामी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया "चुड़ाचांदपुर में हमारी उपस्थिति पहले से ही काफ़ी मज़बूत है क्योंकि हम यहाँ पहले से ही चरमपंथियों से निपट रहे हैं. अब चूहे यहाँ के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं इसिलए हम उनसे भी लड़ रहे हैं." सेना के प्रवक्ता कर्नल गोस्वामी ने कहा कि चूहों को मौत की नींद सुलाने के अलावा सेना किसानों को अदरक और हल्दी की खेती के गुर भी सिखा रही है. अदरक और हल्दी चूहों को आसपास फटकने भी नहीं देते हैं. 'मौतक' चूहों से अनाज की बर्बादी से जो अकाल जैसी स्थिति पैदा होती है उसे 'मौतम' कहते हैं और इसके बाद बारी आती है 'मौतक' की. मौतक में बाँसों में फूल खिलने की प्रक्रिया काफ़ी तेज़ हो जाती है और मिज़ोरम के अधिकारियों के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में मौतक जैसे हालात पैदा हो चुके हैं. इससे फ़सलों को हुए नुक़सान के मद्देनज़र राज्य सरकार किसानों को आलू और अन्य नक़दी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें चूहे बचाएँगे जान02 मई, 2002 | पहला पन्ना चूहे की मदद से सुलझेगी पहेली07 मई, 2002 | पहला पन्ना अब कुत्ते की बारी29 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना चूहे और बिच्छू का ज़ायका23 जून, 2003 | पहला पन्ना बारूदी सुरंग बताएँगे चूहे05 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना चूहों ने अधिकारियों को झुकाया30 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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