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'राजशाही ख़त्म होने की संभावना नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला देश में राजशाही ख़त्म किए जाने की संभावना से साफ़ इनकार किया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि राजशाही ख़त्म करने से देश में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है. उनका मानना है कि इस मुद्दे का फ़ैसला संविधान सभा पर छोड़ देना चाहिए. उनका बयान उस समय आया है जब राजशाही ख़त्म करने की माँग ज़ोर पकड़ रही है. नेपाल की संसद ने पहले ही नेपाल नरेश ज्ञानेंद के ज़्यादातर अधिकार वापस ले लिए हैं. नेपाल में अप्रैल में लोकतंत्र के पक्ष में हुए भीषण प्रदर्शनों संसद के बाद संसद बहाल की गई थी. महत्वपूर्ण है कि अप्रैल में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहली बार गिरिजा प्रसाद कोइराला ने इस विषय पर टिप्पणी की है. नेपाल की राजनीतिक मुख्यधारा में शामिल अनेक पार्टियाँ और माओवादी राजशाही ख़त्म करना चाहते हैं. सरकार और माओवादियों के बीच संविधान सभा चुनावों के मुद्दे पर बातचीत भी हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें पूर्व मंत्रियों को रिहा करने का निर्देश04 जून, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में माओवादियों की बड़ी रैली02 जून, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्षविराम की निगरानी पर सहमति26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल को 'धर्मनिरपेक्ष' बनाने का विरोध25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस ऐसा है माओवादी नेता प्रचंड का जीवन24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अपूर्ण है संसद का प्रस्ताव: प्रचंड19 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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