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अवैध मानव व्यापार पर भारत की आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अवैध मानव व्यापार पर अमरीका की सालाना रिपोर्ट 'ट्रैफिकिंग इन पर्सन' में भारत को 'टीयर टू वॉचलिस्ट' में रखा गया है. यानी भारत सरकार से ये अपेक्षा की गई है कि वह लोगों के अवैध व्यापार पर लगाम लगाने के लिए सख़्त कदम उठाए. इसमें कहा गया है कि बेहतर जीवन-यापन देने का झांसा देकर हर वर्ष लाखों लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर अवैध तरीक़े से भेजा जाता है जहाँ वे शोषण का शिकार होते हैं. रिपोर्ट में मानव व्यापार के खिलाफ़ कानून और उसके क्रियान्वयन के हिसाब से चार श्रेणियाँ बनाई गई है. भारत तीसरे पायदान पर आया है. मतलब इस दिशा में आँखे मूँद कर रहने वाले चौथे पायदान के देशों से यह महज एक कदम ही पीछे है. नतीजा भारत में अमरीका के उप राजदूत रॉबर्ट ब्लैक कहते हैं, "अगर आप रिपोर्ट देखेंगे तो उसमे कहा गया है कि भारत इस दिशा में प्रगति कर रहा है, पर उसके टीयर टू वॉचलिस्ट में होने का मतलब है कि उसे निरंतर इस दिशा में प्रगति करनी होगी और ज़मीनी स्तर पर नतीजे दिखाने होंगे." उन्होंने कहा कि भारत में इस दिशा में प्रगति हुई है. राज्य और केंद्र में समन्वय बेहतर हुआ है, महिला और बाल कल्याण विभाग को मंत्रालय बनाने जैसे कदम उठाए गये हैं. लेकिन अभी भी अवैध मानव व्यापार बड़े पैमाने पर हो रहा हैं. केवल भारत के अंदर ही नहीं, पर भारत से खाड़ी देशों में और नेपाल और बंगलादेश से भारत में. इसलिए इस दिशा में और कदम उठाने की ज़रूरत है. रिपोर्ट आते ही भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा कि यह अमरीकी नज़रिए और सोच पर आधारित है. हम किसी विदेशी सरकार के फ़ैसले सुनाने और हिदायत देने को पूरी तरह से ख़ारिज करते हैं. हरियाणा में लड़कियों को अवैध कब्ज़े से छुड़ाने की सफल कोशिश कर चुके ग़ैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी के ऋषिकांत कहते हैं कि इस पर पाबंदी लगाने के लिए सख़्त क़ानून होने चाहिए. महिलाओं के शोषण पर उन्होंने कहा कि पुराने क़ानून में संशोधन किया गया है जिसके तहत वेश्यालय में पकड़े जाने पर पुरुषों को भी सजा हो सकती है. पहले सिर्फ़ वेश्याएँ ही इस क़ानून में पकड़ी जाती थीं. महत्वपूर्ण इस रिपोर्ट पर भारत सरकार के रवैए से रॉबर्ट ब्लैक हैरान नज़र नहीं आते. वे कहते हैं, "दुनिया में कई सरकारें ये पसंद नहीं करतीं कि दूसरे देश उनके कामकाज का आकलन करें. लेकिन यह मामला दुनिया भर में महत्वपूर्ण हैं. अमरीका में भी ये चिंता का विषय है. हर साल 15 हज़ार से 17000 लोग अवैध रूप से अमरीका लाए जाते हैं” वहीं भारत सरकार की प्रतिक्रिया को इस क्षेत्र में काम कर रहे संगठन इच्छाशक्ति की कमी के रूप में देखते हैं. सेव द चिल्ड्रेन फाउंडेशन के भुवन कहते हैं, "पिछले तीन वर्षों से इस रिपोर्ट में भारत को टीयर टू में रखा गया है. इसका सीधा मतलब है कि अवैध मानव व्यापार पर रोक लगाने के लिए ज़रूरी राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी है." वहीं सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता कॉलिन गोंजालिस कहते हैं, "भारत में अनैतिक मानव व्यापार प्रतिबंध अधिनियम कई वर्षों से लागू है, लेकिन केंद्र और राज्यों की सरकारें इसे सख़्ती से लागू ही नहीं कर रही हैं. " समस्या बड़ी है और वैश्वीकरण के युग में ये गंभीर भी होती जा रही है. इसका निदान तभी संभव होगा जब सरकार, सामाजिक कार्यकर्ता, जागरूक नागरिक सब एकजुट होकर इसका सामना करें. | इससे जुड़ी ख़बरें देश भर की लड़कियाँ बिकती हैं हरियाणा में31 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में महिलाओं को मिली राहत16 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस एमनेस्टी का अमरीका पर आरोप05 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना मानवाधिकार हनन:चीन पर गंभीर आरोप23 मई, 2006 | पहला पन्ना 85 बच्चे छुड़ाए गए | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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