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प्रधानमंत्री का नया प्रस्ताव भी नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों मे अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का विरोध कर रहे मेडिकल छात्रों ने प्रधानमंत्री के एक नए लिखित प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है. रविवार रात मेडिकल छात्रों को दिए गए इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री की ओर से नई आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद भी शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग की सीटों में कोई कमी नहीं होने का आश्वासन दिया गया था. प्रधानमंत्री की ओर से पेश प्रस्ताव में कुछ समितियों के गठन की बात भी कही गई थी जिनकी मदद से अगले एक वर्ष में सीटों की संख्या को यथावत बनाए रखने के लिए ज़रूरी तैयारियाँ की जानी थी. पर इस आश्वासन के बाद भी छात्र अपनी माँगों पर अड़े रहे और कोई समाधान नहीं निकल सका. दिन में केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फ़र्नांडीस के साथ हुई बैठक में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में रेजिडेंट डॉक्टरों के एसेसिएशन के अध्यक्ष विनोद पात्रो ने कहा था कि छात्र चाहते हैं कि सरकार लिखित में आश्वासन दें. पर शाम को सरकार की ओर से जब यह लिखित आश्वासन सामने आ गया तो फिर से अपनी बात से पलटते हुए उन्होंने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया. इस भ्रम की स्थिति पर बीबीसी से बातचीत करते हुए छात्र नेता विनोद पात्रो ने कहा, "सरकार के इस प्रस्ताव से हम सहमत नहीं हैं. हम चाहते हैं कि सरकार पिछले दशकों से अबतक लागू आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करे और नई व्यवस्था वैज्ञानिक आधार पर लागू हो." बैठकें इससे पहले दिन में छात्रों के साथ लगभग साढ़े तीन घंटे चली बातचीत में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फ़र्नांडीस, स्वास्थ्य सचिव पीके होता और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव टीकेए नायर ने भाग लिया. इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला और छात्रों की लिखित आश्वासन की माँग को लेकर ऑस्कर फ़र्नांडीस ने प्रधानमंत्री से शाम सात बजे मुलाकात करके उन्हें इन माँगों से अवगत कराया. इसके बाद प्रधानमंत्री की ओर से तमाम नई बातों और आश्वासनों के साथ एक नया विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया और उसे इन छात्रों को सौंपा गया. देर रात तक चली इस बैठक के बाद हड़ताल कर रहे छात्रों ने इस नए प्रस्ताव को भी मानने से इनकार कर दिया है. उधर देशभर में आरक्षण के विरोध का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा. बंगलौर में लगभग चार हजार छात्रों ने रविवार को आरक्षण विरोधी रैली में भाग लिया. वहां मौज़ूद बीबीसी संवाददाता के अनुसार डॉक्टरों के अलावा प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान और चेन्नई से आए आईआईटी छात्रों ने भी रैली में हिस्सा लिया. एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कहा "हम तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक कि सरकार आरक्षण बढ़ाने का फ़ैसला वापस नहीं ले लेती." | इससे जुड़ी ख़बरें सभी राज्यों में आईआईएम खोले जाएं28 मई, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण के ख़िलाफ़ हड़ताल का आह्वान25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मेडिकल छात्रों की हड़ताल जारी26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मेडिकल छात्रों से मिले प्रधानमंत्री26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण के विरोध में महारैली27 मई, 2006 | भारत और पड़ोस पिछड़ों को आरक्षण जून 2007 से23 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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