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संसद का साथ दे सकते हैं माओवादी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में एक प्रमुख माओवादी नेता ने ऐसे संकेत दिए हैं कि माओवादी विद्रोही संविधान सभा के गठन के नेपाली संसद के फ़ैसले का समर्थन कर सकते हैं. माओवादी विद्रोहियों के दूसरे नंबर के नेता बाबूराम भट्टाराई ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा है कि यदि स्वतंत्र रूप से निर्वाचित संविधान सभा किसी निर्णय पर पहुँचती है तो उनके गुट को उसे स्वीकार करना होगा. बाबूराम भट्टाराई ने कहा,"हमें लगता है कि ये लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ा हुआ एक क़दम है लेकिन अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि संविधान सभा संप्रभु और स्वतंत्र होगी कि नहीं जिससे कि ये राजशाही के बारे में कोई फ़ैसला कर सके". उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि लगता नहीं कि ऐसी कोई संविधान सभा राजशाही को बनाए रखना चाहेगी. संवाददाताओं का कहना है कि यदि बाबूराम भट्टाराई के बयानों से माओवादी सहमत हुए तो ये उनकी ओर से राजनीतिक समझौता करने की दिशा में एक बड़ा क़दम होगा. नेपाल में संसद ने रविवार को एक महत्वपूर्ण क़दम उठाते हुए नई संविधान सभा के गठन का निर्णय किया था जो देश के लिए नया संविधान तैयार करेगी राजशाही के भविष्य पर भी निर्णय करेगी. रविवार को पहले नेपाल नरेश ने नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गिरिजा प्रसाद कोईराला को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई जिसके बाद संसद में संविधान सभा के गठन फ़ैसला किया गया. नेपाली संसद के 205 सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया. हालाँकि संविधान सभा कब गठित की जाएगी और उसकी प्रक्रिया क्या होगी, इस पर निर्णय नहीं हो पाया है. पिछले 10 साल से राजशाही के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़े हुए माओवादियों की एक प्रमुख माँग संविधान सभा के गठन की माँग थी. नेपाल में अभी जो संविधान है उसमें राजशाही की भूमिका में बदलाव की कोई व्यवस्था नहीं है. |
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