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आरएसएस नेता ने की सोनिया की तारीफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य ने 'लाभ के पद' के मामले में लोकसभा और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से सोनिया गाँधी के इस्तीफ़े की तारीफ़ की है. उन्होंने सोनिया गाँधी के इस्तीफ़े को एक सुविचारित और परिपक्व राजनीतिक क़दम बताते हुए कहा है कि इससे उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को नया जीवन मिल सकता है. लेकिन आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइज़र के पूर्व संपादक शेषाद्रिचारी ने कहा है कि इसे आरएसएस की नहीं वैद्य की निजी राय मानना चाहिए. दूसरी ओर नागपुर से वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे का कहना है कि ऐसा मानने का कोई कारण ही नहीं है कि जो वैद्य कह रहे हैं वो आरएसएस की राय नहीं है. क्यों इससे पहले भी एमजी वैद्य की बातों पर ये विवाद हो चुका है कि वो आरएसएस की राय है या नहीं और ज़्यादातर बार संघ की ओर से कहा गया है कि ये वैद्य की अपनी राय है. इस बार एमजी वैद्य ने सोनिया गाँधी की तारीफ़ नागपुर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र तरुण भारत में अपने नियमित कॉलम में की है. इसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना कहा है कि जो लोग सोनिया गाँधी के इस्तीफ़े को नाटक बता रहे हैं उन्हें अपने संसद सदस्यों से भी इस्तीफ़ा देने को कहना चाहिए. हालांकि वैद्य की इस राय के बारे में ऑर्गेनाइज़र के पूर्व संपादक शेषाद्रिचारी ने कहा है कि वे नहीं मानते कि ये आरएसएस की राय है. उन्होंने कहा कि ये एमजी वैद्य की निजी राय है. उनका 'लाभ के पद' के विवाद के बारे में कहा कि ये दो व्यक्तियों, जया बच्चन और सोनिया गाँधी के बीच विवाद के कारण है. उनका कहना था कि यूपीए सरकार में गृहमंत्री और क़ानून मंत्री आदि की भूल के कारण ये घटना घटी. लेकिन नागपुर में वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे मानते हैं कि तरुण भारत में कुछ लिखा जा रहा है, जो एक तरह से आरएसएस का ही अख़बार माना जाता है, और वो भी एमजी वैद्य जैसे वरिष्ठ नेता के स्तंभ में तो ये क़तई संभव नहीं है कि वह आरएसएस की राय न हो. उनका कहना है कि वैद्य लगातार ऐसा लिख रहे हैं. उनका मानना है कि आरएसएस यदि सोनिया गाँधी की तारीफ़ कर रहा है तो इसका कारण यह भी है कि शुचिता उनके लिए बड़ा मुद्दा रहा है. आरएसएस ने भाजपा से हमेशा शुचिता की उम्मीद की और जब भाजपा सरकार में थी तो आरएसएस ने इस मामले में नेताओं की खुली निंदा भी की. वे कहते हैं, "एक कारण यह भी है कि आरएसएस कांग्रेस को अपना दुश्मन नहीं मानती और उसे लग रहा है कि यदि सोनिया गाँधी इस्तीफ़ा देकर परोक्ष रुप से आरएसएस के कट्टर दुश्मन वामदलों को कटघरे में खड़ा कर रही है तो कांग्रेस का साथ देना चाहिए." प्रकाश दुबे का कहना है कि आरएसएस तो पहले भी कई मुद्दों पर कांग्रेस का साथ देती रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'लाभ के पद' पर सहमति की संभावना27 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'लाभ के पद' पर सहमति की कोशिश26 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस लाभ के पद मामले में सलाह मांगी24 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'देश मेरी इस भावना को समझेगा'23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस सोनिया गांधी का लोकसभा से इस्तीफ़ा 23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस एनडीए ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप को कहा22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस संसद का सत्र बीच में ही ख़त्म23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'लाभ के पद' को लेकर संसद में हंगामा22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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