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दासमुंशी आज सौंपेंगे अपनी रिपोर्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में 'लाभ के पद' को फिर से परिभाषित करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनती दिखाई दे रही है. दो दिनों तक विपक्ष और सरकार में शामिल विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चर्चा के बाद संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी सोमवार को अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपने जा रहे हैं. इस बीच सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अध्यादेश नहीं लाएगी. इसका अर्थ यह है कि 'लाभ के पद' को परिभाषित करने के लिए सरकार मौजूदा क़ानून में संशोधन करने के लिए संसद का सत्र बुलाएगी. लेकिन ये सत्र कब बुलाया जाएगा और क्या इससे पहले क्या सर्वदलीय बैठक भी होगी, इसकी घोषणा सरकार को करनी है. उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले यह विवाद खड़ा हो गया था कि कोई व्यक्ति 'लाभ के पद' पर रहते हुए संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं रह सकता. हालाँकि संसद के किसी भी सदन के लिए निर्वाचित होने की यह संवैधानिक शर्त है कि उम्मीदवार को किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए लेकिन जया बच्चन के मामले और इसके बाद सरकार की ओर से कथित तौर पर अध्यादेश लाने की कोशिशों की वजह से इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया. चुनाव आयोग ने फ़िल्म अभिनेत्री और राज्य सभा सदस्य जया बच्चन की सदस्यता इसी आधार पर रद्द करने की सिफ़ारिश कर दी थी क्योंकि वह उत्तर प्रदेश फ़िल्म विकास निगम की अध्यक्ष थीं जिसे लाभ का पद माना गया. उसके बाद लोकसभा में हंगामा होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी संसद की सदस्यता और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. कोशिशें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निर्देश पर संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने शनिवार और रविवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से चर्चा की.
विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के अलावा उन्होंने वामपंथी दलों के नेता सीताराम येचुरी और डी राजा, एनसीपी नेता शरद पवार और आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव से चर्चा की. दासमुंशी ने शिवसेना, जेडीयू, बीजेडी, एमडीएमके जैसे छोटे दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बातचीत की. इन चर्चाओं के आधार पर वे सोमवार को एक रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे हैं. इस मामले में भाजपा के अलावा लगभग सभी दल सर्वदलीय बैठक बुलाकर एक सर्वसम्मत फ़ैसला करने के पक्ष में हैं. संभावना जताई जा रही है कि पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों के तुरंत बाद संसद का सत्र बुलाया जा सकता है. अध्यादेश नहीं
इस मामले में विवाद इस ख़बर से ही बढ़ा था कि सरकार संसद के सत्र को ख़त्म करके एक अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है. सरकार के क़दमों से इसकी पुष्टि भी होती थी लेकिन बाद में सरकार ने अध्यादेश लाने की कोई पहल नहीं की. संसदीय कार्यमंत्री दासमुंशी ने भी कहा कि सरकार अध्यादेश नहीं ला रही है लेकिन ख़बरें हैं कि राजनीतिक दलों के नेताओं से चर्चा में उन्होंने अध्यादेश की संभावनाओं पर भी विचार विमर्श किया. लेकिन रक्षामंत्री और लोकसभा में सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने साफ़ किया है कि सरकार 'लाभ के पद' को फिर से परिभाषित करने के लिए कोई अध्यादेश नहीं लाने जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ही अगला क़दम उठाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'लाभ के पद' पर सहमति की कोशिश26 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अनिल अंबानी का राज्यसभा से इस्तीफ़ा25 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 39 विधायकों की इस्तीफ़े की पेशकश25 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस लाभ के पद मामले में सलाह मांगी24 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस सोनिया के इस्तीफ़े की ख़बर से भरे अख़बार24 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस सोनिया गांधी का लोकसभा से इस्तीफ़ा 23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस सीपीएम क़ानून बनाने के पक्ष में23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस एनडीए ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप को कहा22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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