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मंगलवार, 14 फ़रवरी, 2006 को 12:42 GMT तक के समाचार
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हिंसक प्रदर्शन में दो लोग मारे गए
आँसू गैस
कई जगह पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया
पाकिस्तान में पैंगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं और पंजाब असेंबली, अमरीकी रेस्तरां, बैंकों समेत कई इमारतों को निशाना बनाया गया है. एक बैंक के गार्ड ने गोलियाँ चलाईं जिससे दो लोग मारे गए.

कई जगह हज़ारों प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुई हैं और 41 लोग घायल हो गए हैं.

लाहौर में हज़ारों लोगों ने मैकडोनाल्ड और केंटकी फ़्राइड चिकेन की दुकानों को आग लगाने की कोशिश की और पुलिस ने उत्तेजित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया.

पंजाब असेंबली को आग लगाने की कोशिश कर रही एक भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को हवा में भी गोलियाँ चलानी पड़ीं.

पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री आफ़ताब शेरपाओ ने पुष्टि की है कि लाहौर में एक बैंक के बाहर गोलियाँ चलीं और दो लोग मारे गए.

छात्रों पर लाठी चार्ज

इस्लामाबाद में पुलिस ने राजनयिक क्षेत्रों में घुसने का प्रयास कर रहे सैकड़ों छात्रों को रोकने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठी चार्ज किया.

 उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए और वायदा करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं होगी. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप किसी धर्म का मख़ौल उड़ाएँ
सांसद नैयर बुख़ारी

सबसे पहले डेनमार्क में प्रकाशित हुए इन कार्टूनों ने दुनिया भर में मुसलमानों का ग़ुस्सा भड़काया है.

इस्लामाबाद में स्थानीय राजनीतिज्ञों ने एक मार्च का आयोजन किया जिसमें छात्रों और सभी दलों के सासंदों ने हिस्सा लिया.

रिपोर्टों के मुताबिक कई कारों को नुक़सान पहुँचाया गया.

इस्लामाबाद से सांसद नैयर बुख़ारी ने एपी से एक बातचीत में बताया कि प्रदर्शनकारी डेनमार्क और नॉर्वे के दूतावासों में जाकर वहाँ ज्ञापन देंगे.

धर्म का मख़ौल

बुख़ारी का कहना था, उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए और वायदा करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं होगी. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप किसी धर्म का मख़ौल उड़ाएँ.

सोमवार को पुलिस ने पेशावर में कार्टूनों का विरोध कर रहे तीन हज़ार छात्रों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया.

यह प्रदर्शन पहले ऐसे प्रदर्शन थे जिन्होंने हिंसक रूप धारण कर लिया हालाँकि इस मामले को लेकर विरोध पिछले महीने के अंत से ही जारी है.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि जिन अख़बारों ने ये कार्टून छापे हैं वे इस बात से वाक़िफ़ नहीं थे कि इसका दुनिया भर में शांति और सदभाव पर कितना ख़राब असर पड़ेगा.

पिछले हफ़्ते अफ़ग़ानिस्तान में कार्टूनों का विरोध कर रहे कम से कम बारह लोगों की जानें गई थीं.

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