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रविवार, 12 फ़रवरी, 2006 को 18:18 GMT तक के समाचार
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एक साल बाद लौटे अवामी लीग के सांसद
शेख़ हसीना
शेख़ हसीना ने चुनाव सुधार के प्रस्तावों को लेकर संसद लौटने की घोषणा की थी
बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी अवामी लीग के सांसद पिछले एक साल से चल रहा अपना बहिष्कार समाप्त कर फिर से संसद की कार्यवाही में शामिल हुए.

अवामी लीग की पार्टी प्रमुख शेख़ हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग के लगभग 60 सांसद रविवार को पार्टी प्रमुख शेख़ हसीना की अगुआई में सत्ता सदन में आए.

इस दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने नारे लगाए और मेज़ें थपथपाकर अवामी लीग के सांसदों का स्वागत किया.

अवामी लीग के सांसदों ने इससे पहले अंतिम बार दिसंबर 2004 में संसद के सत्र में हिस्सा लिया था.

पार्टी ने ये कहते हुए संसद की बैठक का बहिष्कार कर दिया था कि उन्हें सदन में बहसों में नहीं बोलने दिया जा रहा.

बांग्लादेश के सत्ताधारी दल ने अवामी लीग के सदस्यों के सदन वापस लौटने के फ़ैसले का स्वागत किया है.

बांग्लादेश सरकार ने चुनाव सुधार के लिए अवामी लीग नेता की ओर से सुझाए गए प्रस्ताव पर बहस कराने की भी पेशकश की है.

चुनाव सुधार

बेगम ख़ालिदा ज़िया
प्रधानमंत्री बेगम ख़ालिदा ज़िया अभी तीन दिनों के लिए पाकिस्तान दौरे पर हैं

अवामी लीग के सांसदों ने चुनाव सुधार संबंधी कई प्रस्तावों को सदन में रखा.

बांग्लादेश सरकार के एक प्रवक्ता ने प्रस्तावों पर बहस कराने की सिफ़ारिश की है.

अवामी लीग की नेता और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने इस महीने के आरंभ में ये घोषणा कर सबको चौंका दिया था कि वे चुनाव सुधार की कुछ महत्वपूर्ण बातों को लेकर संसद में लौटनेवाली हैं.

इन प्रस्तावों को बांग्लादेश के अगले आम चुनाव की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए आवश्यक बताया जा रहा है.

बांग्लादेश में इस वर्ष अक्तूबर से पहले चुनाव संभव नहीं हैं.

वर्तमान प्रावधानों के अनुसार बांग्लादेश में आम चुनाव एक कार्यवाहक सरकार के तहत कराए जाते हैं जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को सौंपा जाता है.

मगर शेख़ हसीना ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि कार्यवाहक सरकार का भार सभी राजनीतिक दलों के सहमति के बाद देश के राष्ट्रपति द्वारा चुने गए एक व्यक्ति को सौंपा जाना चाहिए.

बांग्लादेश सरकार ने पहले प्रस्ताव पर बहस कराने से मना कर दिया था लेकिन बाद में इसके लिए इस शर्त पर तैयार हो गई कि इन प्रस्तावों को संसद में पेश किया जाना चाहिए.

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