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बोली प्रक्रिया पर रिलायंस का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण के लिए बोली लगानेवाले रिलायंस एयरपोर्ट डेवलपर ने गुरूवार को दिल्ली हाईकोर्ट में निविदा प्रक्रिया को रद्द करने के लिए याचिका दायर की. अनिल अंबानी की कंपनी के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि दिल्ली हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण का ठेका जीएमआर-फ़्रेपोर्ट समूहों को देना 'ग़ैर-क़ानूनी और मनमाना फ़ैसला' है. प्रवक्ता ने ये भी दावा किया कि तकनीकी आधार पर उनकी कंपनी दोनों हवाई अड्डों के लिए बोलियाँ लगाने में सबसे आगे रहनेवाली दो कंपनियों में से एक थी. प्रवक्ता ने ये भी कहा कि दिल्ली हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण के लिए सबसे बड़ी बोली उन्हीं की कंपनी ने लगाई थी. लेकिन प्रवक्ता ने साथ ही कहा कि उनकी कंपनी सरकार की सुधार प्रक्रिया का पूरा समर्थन करती है. प्रवक्ता ने याचिका के बारे में ये कहते हुए अधिक जानकारी देने से मना कर दिया कि ये मामला अभी अदालत में है. याचिका में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, केंद्र सरकार और जीएमआर ग्रुप को प्रतिवादी बनाया गया है. दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के निजीकरण के लिए सोमवार को जीएमआर इंडस्ट्रीज़ और फ़्रैंकफ़र्ट के एयरपोर्ट ऑपरेटर फ़्रेपोर्ट तथा जीवीके ग्रुप और उसके दक्षिण अफ़्रीकी सहयोगी ने दोनों हवाई अड्डों के निजीकरण के लिए निविदाएँ डाली थीं. भारत सरकार ने मंगलवार को विचार-विमर्श के बाद बुधवार को इन सौदों को स्वीकृति दे दी. इन कंपनियों को हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण के काम में 74 प्रतिशत की हिस्सेदारी दी गई है जबकि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पास 26 प्रतिशत हिस्सा रहेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें हवाईअड्डा कर्मियों की हड़ताल जारी02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डों पर हड़ताल का मिलाजुला असर01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डा निजीकरण को मंज़ूरी01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस निजीकरण के विरोध में हड़ताल 31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाई अड्डों के ठेकों का फ़ैसला31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डा कर्मियों की हड़ताल की धमकी30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डा निजीकरण की निविदाएँ30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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