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भारत पर उठाई पाकिस्तान ने आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान का कहना है कि सिर्फ़ ऐसा देश ही इस्लामी देशों के संगठन (ओआईसी) में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हो सकता है जिसका किसी सदस्य देश से विवाद न हो. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तस्नीम असलम ने भारत के नाम लिए बिना यह बयान दिया है. दरअसल, सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि भारत को ओआईसी में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया जाना चाहिए और पाकिस्तान को चाहिए कि वह इसका प्रस्ताव रखे. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला के बयान पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की लेकिन कहा कि ओआईसी में किसी ग़ैर मुस्लिम देश को शामिल करने के बारे में विचार-विमर्श का दौर जारी है. तस्नीमा असलम ने बताया कि ओआईसी ने इसके लिए एक समिति गठित की है लेकिन उसे किसी निष्कर्ष पर पहुँचने में अभी समय लग सकता है. पाकिस्तानी प्रवक्ता का कहना था कि ओआईसी की समिति इस बात पर विचार कर रही है किसी देश को किन शर्तों पर शामिल किया जा सकता है. असलम ने कहा कि जो देश ओआईसी में पर्यवेक्षक का दर्जा चाहते हैं उनका किसी सदस्य देश से विवाद नहीं होना इन शर्तों में से एक है. ज़ाहिर है, उनका इशारा कश्मीर विवाद की तरफ़ था. भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ तेल और गैस के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाना चाहते हैं. शाह अब्दुल्ला 26 जनवरी के समारोहों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'कश्मीर तनाव का मुख्य कारण' | भारत और पड़ोस सेना इराक़ भेजने का ओआईसी का प्रस्ताव13 अक्तूबर, 2003 को | पहला पन्ना मुस्लिम देशों के पिछड़ेपन पर चिंता14 जून, 2004 | पहला पन्ना गिलानी को ओआईसी का निमंत्रण नहीं26 जून, 2005 | भारत और पड़ोस इस्लामी देशों को आतंकवाद की चिंता08 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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