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इस्लामी देशों को आतंकवाद की चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के 57 मुस्लिम देशों का शिखर सम्मेलन नेताओं की इस चेतावनी के साथ समाप्त हुआ है कि इस्लामी जगत को आतंकवाद के ख़तरे का सामना है. इस्लामिक कॉन्फ़्रेंस संगठन(ओआईसी) के दो दिनों के शिखर सम्मेलन के बाद जारी घोषणा पत्र में ख़तरनाक विचारों के ख़िलाफ़ मिलकर कार्रवाई करने की ज़रूरत पर बल दिया गया है. सउदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हुई बैठक में नेताओं ने आतंकवाद के वित्त पोषण और उसे बढ़ावा दिए जाने को अपराध घोषित करने के लिए राष्ट्रीय क़ानूनों में बदलाव की भी ज़रूरत बताई है. घोषणा पत्र में आतंकवाद के ख़तरे के बारे में कहा गया, "इस्लामी राष्ट्र संकट में हैं. (आतंकवाद का) मौजूदा ख़तरा न सिर्फ़ वर्तमान के लिए, बल्कि भविष्य के लिए और पूरी मानवता के लिए है." नेताओं ने आतंकवादी विचार धारा के मुक़ाबले के लिए स्कूली पाठ्यक्रम को बदले जाने पर भी ज़ोर दिया. ओआईसी के नेताओं ने घोषणा पत्र में कहा है कि फ़तवा वे लोग ही जारी कर सकते हैं जिन्हें कि ऐसा करने का अधिकार है. बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार ओआईसी नेताओं की इन घोषणाओं पर कितनी कार्रवाई होती है ये तो देखने वाली बात होगी क्योंकि अक्सर ऐसे अवसरों पर किए गए बड़े-बड़े वायदे भुलाए जाते रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इसराइल को यूरोप में जगह दे दो'08 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना मक्का में गोलीबारी में चार की मौत22 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना लाखों श्रद्दालुओं ने हज किया 20 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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