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सोमवार, 14 जून, 2004 को 21:01 GMT तक के समाचार
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मुस्लिम देशों के पिछड़ेपन पर चिंता
ओआईसी के मंत्री
ओआईसी में आत्ममंथन का दौर चल रहा है
क़ुरान की आयतों के पाठ के साथ इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी के 57 सदस्यों की बैठक शुरू हुई.

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है कि जबकि कुछ ही दिनों पहले दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों के संगठन जी-8 ने मध्य पूर्व में राजनीतिक सुधारों पर ज़ोर देने की बात कही है.

शुरुआत में ही ओआईसी के महासचिव डॉ अब्दुलवाहेद बलकज़ीज ने ज़ोरदार भाषण में मुस्लिम जगत की नाकामियों पर ज़ोर दिया.

उन्होंने विदेश मंत्रियों को बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के मामले में उनके देशों का रिकॉर्ड काफ़ी ख़राब है.

उन्होंने कहा कि "हम सब सदस्य देशों का कुल सकल घरेलू उत्पाद भी फ़्रांस या ब्रिटेन जैसे किसी एक विकसित देश से कम है."

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के इतिहास और वर्तमान में काफ़ी अंतर आ गया है. अब वो बँटा हुआ है, बिखरा हुआ है, अपना आधार खो रहा है और कमज़ोर हो गया है.

 हर जगह पूर्वाग्रह, कट्टरपन और भेदभाव दिखाई देता है और असुरक्षा की वजह से दुनिया में आर्थिक संकट का ख़तरा है
अब्दुल्ला गुल, तुर्की के विदेश मंत्री

महासचिव ने कहा, "मुस्लिम जगत आज जो अक्षमता महसूस कर रहा है और उसकी जायज़ मांगों का हल भी नहीं निकल रहा, उसी ने चरमपंथ को बढ़ावा दिया है. चरमपंथियों को भी अपने घिनौने काम करने का मौक़ा मिल गया है."

चिंताएँ

"यही कारण है कि हमें चरमपंथ का मुक़ाबला दृढ़ निश्चय से करना है क्योंकि ये वो समय है जब हम दुनिया में इस्लाम की छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं."

मेज़बान देश तुर्की के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला ग़ुल ने भी कुछ ऐसी ही बातें कहीं, "जो लोग सभ्यताओं के संघर्ष का पाठ पढ़ा रहे हैं, उनकी बात ज़्यादा लोग सुन रहे हैं. हर जगह पूर्वाग्रह, कट्टरपन और भेदभाव दिखाई देता है और असुरक्षा की वजह से दुनिया में आर्थिक संकट का ख़तरा है."

वहीं संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लख्दर ब्राहिमी ने इराक़ की नई अंतरिम सरकार के लिए समर्थन माँगा. उन्होंने कहा कि इराक़ के सामने कई चुनौतियाँ हैं, उसे चुनाव के लिए तैयार करना है. वहाँ की अंतरिम सरकार ने ओआईसी से समर्थन माँगा है और ये समर्थन देना सब के हित में है.

महासचिव के तौर पर डॉ अब्दुलवाहेद बलकज़ीज का ये ओआईसी का आख़िरी सम्मेलन है क्योंकि वो रिटायर हो रहे हैं. वो 2001 से इस पद पर हैं. अब इस पद के लिए भी जुगत शुरू हो गई है और तुर्की भी इसे पाने की कोशिश में है.

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