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क्या है सऊदी अरब में तनाव का कारण?
रियाद में हुए ताज़ा बम विस्फ़ोट सऊदी अरब प्रशासन और इस्लामिक चरमपंथियों के बीच बढ़ते तनाव का प्रमाण है. छह महीने पहले ही सऊदी प्रशासन यह स्वीकार ही नहीं करता था कि उनके देश में अल क़ायदा की कोई गतिविधियाँ हैं. इसके बाद मई के महीने में दो आत्मघाती हमले हुए और विस्फोटों में 35 लोगों की जानें गईं. इसके बाद सऊदी प्रशासन का अभियान और छापों का दौर शुरु हुआ. पुलिस और चरमपंथियों के बीच कुछ गोलीबारी वाली मुठभेड़ें भी हुईं. बड़ी संख्या में हथियार ज़ब्त किए गए और छह सौ से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया. बीबीसी संवाददाता पॉल वुड का विश्लेषण है कि चरमपंथी न केवल सऊदी अरब में रहने वाले पश्चिम के लोगों के ख़िलाफ़ हैं बल्कि वे शाही परिवार से भी मुक्ति चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि शाही परिवार अमरीका के हाथों की कठपुतली बन गया है. इन सबके चलते चरमपंथियों ने एक अप्रत्याशित क़दम उठाते हुए कुछ शाही परिवार पर दबाव डालना शुरु कर दिया है कि वह देश में कुछ राजनीतिक सुधार लागू करे. वे सऊदी जनता के बीच अपने समर्थन का दावा साबित करने के लिए अगले साल चुनाव का भी आश्वासन दे रहे हैं. अमरीका और ब्रिटेन की चिंता दूसरी ओर शाही परिवार का दावा है कि देश में अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में वे जीत रहे हैं दुसरी और अल क़ायदा का कहना है कि कई 'आतंकवादी तो शाही परिवार ने ख़ुद ही खड़े किए थे.' अब सबसे चिंता की बात यह है कि क्या सऊदी प्रशासन वहाँ रह रहे पैंतीस हज़ार अमरीकियों और कोई तीस हज़ार कामगारों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेगा? अमरीका और ब्रिटेन की मुख्य चिंता यह है कि क्या उनका मित्र शाही परिवार अपना समर्थन क़ायम रख पाएगा या क्या वह चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रख पाएगा जो उसे सत्ता से हटाना चाहते हैं. क्योंकि यदि वह असफ़ल होता है तो अमरीका और ब्रिटेन की आतंक के लड़ाई कमज़ोर हो जाएगी. असमंजस दूसरी ओर अरब न्यूज़ के मुख्य संपादक ख़ालिद अलमैना का कहना है कि सऊदी अरब में इस विस्फ़ोट को लेकर असमंजस है. उनका कहना है कि जिस इलाक़े में विस्फ़ोट हुआ है वह ग़रीब लोगों का इलाक़ा है और वहाँ विदेशी तो नहीं ही रहते. ख़ालिद अलमैना ने बीबीसी से बात करते हुए इस बात से असहमति जताई कि सऊदी अरब का शाही परिवार अमरीका की कठपुतली है. लकिन उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि चरमपंथियों की सरकार या शाही परिवार से दुश्मनी बढ़ी है. उन्होंने कहा, ''कोई भी चरमपंथी संगठन सरकार और समाज का दुश्मन ही होता है.'' |
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