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नहीं मनेगा कृष्णा का पहला जन्मदिन

कृष्णा और उसकी माँ
कृष्णा का जन्म सूनामी आने के कुछ देर पहले हुआ था
भारत में सूनामी का 'ग्राउंड ज़ीरो' कहे जाने वाले नागपट्टनम के अक्कराईपेट्टाई में एक अस्थायी शिविर में रहने वाले कृष्णा का ये सौभाग्य है या दुर्भाग्य यह कहना ज़रा मुश्किल काम है.

सूनामी बेबी के नाम से पुकारे जाने वाला कृष्णा 26 दिसंबर को अपने जीवन का एक साल पूरा करेगा. जबकि उसके जन्मदिन पर घर के आसपास रहने वाले सभी लोग अपने परिजनों की बरसी मना रहे होंगे.

गले में सोने की पतली सी चेन, माथे पर बुरी नज़र से बचाने के लिए लगाया काला टीका, नंग-धडंग खेल रहे कृष्णा की माँ को जब पता चला कि कोई उससे मिलने आया है तो उसे फ़ौरन अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए गए.

हाथों में एक बेर लेकर चार नए दाँतों के साथ खिलखिलाता कृष्णा इन बातों से बेख़बर अपनी धुन में मगन है. लेकिन उसकी माँ लीलावती के लिए उसका पहला जन्मदिन भावनात्मक तौर पर बहुत मुश्किल दिन होने वाला है.

खुशी मनाएँ?

सूनामी से थोड़ी ही देर पहले पैदा हुए कृष्णा की माँ लीलावती का कहना है कि वे अपने दुलारे बेटे का पहला जन्मदिन मनाना तो चाहती हैं लेकिन कोई ऐसा नहीं है जो उस दिन उनकी ख़ुशियों में शरीक हो सके.

 मैं कैसे खुशी मना सकती हूँ जब मेरे आसपास के सारे लोग उस दिन को याद करके दुखी हो रहे होंगे. मैं बस ईश्वर का धन्यवाद करूँगी कि उसने मेरे कृष्णा को बचा लिया
लीलावती, कृष्णा की माँ

वे कहती हैं,"मैं कैसे खुशी मना सकती हूँ जब मेरे आसपास के सारे लोग उस दिन को याद करके दुखी हो रहे होंगे. मैं बस ईश्वर का धन्यवाद करूँगी कि उसने मेरे कृष्णा को बचा लिया."

टीन की छत वाली एक कमरे की कोठरी में रह रहीं लीलावती कहती हैं,"कृष्णा के जन्मदिन की खुशी मैं सिर्फ़ बच्चों के बीच चॉकलेट बाँटकर मनाऊँगी."

संकट

कृष्णा की कहानी भगवान कृष्ण से काफ़ी मिलती है.जिस तरह भगवान कृष्ण को जन्म के बाद टोकरे में रखकर उफ़नती नदी के पार ले जाया गया था कुछ वैसा ही कृष्णा के साथ भी हुआ.

कहते हैं कि भगवान के कृष्ण के पैर छुकर नदी ने रास्ता दे दिया लेकिन नागपट्टनम के इस कृष्णा का जीवन बचाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा.

कृष्णा की बुआ पद्मलक्ष्मी बताती हैं कि उसके पैदा होने के थोड़ी ही देर बाद अस्पताल में सूनामी का पानी सीने तक तक आ गया.

वे बताती हैं,"डॉक्टरों ने किसी तरह तीन-चार बिस्तरों को एक के ऊपर रखकर कृष्णा को लिटाया.मुझे लग रहा था कि बच्चा इसी पानी में डूब जाएगा."

कृष्णा के जन्म के बाद अस्पताल की सारी व्यवस्था पानी की वजह से ठप हो गई. लेकिन नागपट्टम के अक्कराईपेट्टई ब्लॉक की प्रमुख नर्स एस रंजिनी का कहना है कि पूरे अस्पताल के लिए कृष्णा जान से ज़्यादा प्यारा था.

रंजिनी कहती हैं,"अस्पताल के डॉक्टरों ने उस पर पूरा ध्यान दिया और पानी उतर जाने तक उसे सुरक्षित रखा."

कृष्णा पूरी बस्ती का दुलारा ज़रूर है लेकिन उसकी बस्ती के लोग उसका जन्मदिन शायद ही कभी मनाएँगे क्योंकि उस दिन लगभग आठ हज़ार लोगों की बरसी होगी.

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