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नाथूराम के भाई गोपाल गोडसे की मृत्यु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या का षडयंत्र रचनेवालों में से अंतिम बचे हुए व्यक्ति गोपाल गोडसे की मृत्यु हो गई है. गोपाल विनायक गोडसे 86 वर्ष के थे. उन्होंने शनिवार की रात महाष्ट्र में पुणे स्थित अपने घर पर अंतिम साँस ली. उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या में अपनी भूमिका के लिए कभी कोई अफ़सोस नहीं किया. उनके अपराध के लिए उन्हें 16 वर्ष जेल में बिताने पड़े थे. महात्मा गांधी की 78 वर्ष की आयु में हत्या कर दी गई थी. उन्हें दिल्ली में 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मार दी थी. कारण नाथूराम गोडसे और एक अन्य षडयंत्रकारी को महात्मा गांधी की हत्या के आरोप में फांसी की सज़ा दी गई थी. गोपाल गोडसे ने भी गांधीजी को मारने का प्रयास किया था लेकिन वे सकते में आ गए और उनकी ऊँगलियाँ पिस्तौल का ट्रिगर नहीं चला सकीं. गोपाल गोडसे पर मुक़दमा चला और हत्याकांड में उनकी भूमिका के लिए उन्हें 16 वर्ष की जेल की सज़ा हुई. जेल से आने के बाद वे पुणे में रहे और गांधीजी और उनकी हत्या संबंधी कई किताबें लिखकर आजीविका चलाई. उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और दो बेटियाँ हैं. लेकिन उन्होंने अपनी मृत्यु तक अपने कृत्य पर कोई खेद नहीं प्रकट किया. वे ये कहते थे कि गांधीजी का मरना आवश्यक था क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान निर्माण का समर्थन कर हिंदुओं को धोखा दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें गांधी और शास्त्री के मूल्य: कितने प्रासंगिक? 02 अक्तूबर, 2005 | आपकी राय गांधी-नायडू के पत्र व्यवहार पर नाटक 17 अगस्त, 2005 | मनोरंजन फ़लस्तीनियों के लिए 'गाँधी'11 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना क्यों ग़लत लग रही है गाँधी की सीख12 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस नष्ट हो रही है गाँधी जी की धरोहर02 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस नेहरू-गाँधी परिवार का राजनीतिक सफ़र16 मई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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