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फ़लस्तीनियों के लिए 'गाँधी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी इलाक़ों में 'गाँधी' रिलीज़ की गई है ताकि फ़लस्तीनियों में अहिंसक विरोध के तरीके से परिचित कराया जा सके. रामल्ला में इस फ़िल्म का प्रीमियर हुआ जिसमें फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के साथ इस फ़िल्म में गांधी का किरदार निभाने वाले बेन किंग्सले मौजूद थे. रिपोर्टों के अनुसार यह फ़िल्म देखने आए कई फ़लस्तीनी गांधी के अहिंसक विरोध के तरीकों से सहमत नहीं दिखे. भारत में ब्रिटिश राज के ख़िलाफ़ गांधी के अहिंसक विरोध के विषय पर बनी यह फ़िल्म फ़लस्तीनी इलाक़ों के शरणार्थी शिविरों समेत सभी क्षेत्रों में मुफ्त में दिखाई जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि इस फ़िल्म से फ़लस्तीनी अहिंसक विरोध के तरीके को आजमा सकते हैं. यह फ़िल्म लेबनान, सीरिया और जार्डन में भी डीवीडी के ज़रिए युवकों को दिखाने की योजना है. प्रभावशाली विषय
गांधी फ़िल्म दिखाने और गांधी का संदेश फ़लस्तीनियों तक पहुंचाने की पूरी योजना में इंटरनेट पर नीलामी करने वाली साइट ईबे ने भूमिका निभाई है. साइट के संस्थापकों में से एक जेफ स्कोल ने रामल्लाह में कहा " हमने राष्ट्रपति अब्बास से बात की जिन्होंने हमसे अच्छा बर्ताव किया और इस योजना को पूरी सहायता दी. " इस फ़िल्म को अरबी भाषा में बदलने में मदद की ईरानी मूल के अमरीकी व्यवसायी कामरान इलाहियन ने. इलाहियन कहते हैं कि फ़िल्म का विषय बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है. भाषा बदलने से विषय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा " फ़िल्म का संदेश नया है और लोगों पर इसका प्रभाव ज़रुर पड़ेगा. " हालांकि फ़िल्म देखने वाले कई युवक इससे असहमत थे. 21 वर्षीय डी ओपाही कहते हैं, " अगर हमने इसराइल का हिंसक विरोध करना बंद किया तो वो हमारी सारी ज़मीनें ले लेगा. " इसके बावजूद इलाहियन मानते हैं कि फ़लस्तीनी गांधी के आर्दशों को अपना सकते हैं. उनका संदेश था " हमारा सपना है कम से कम बीस हज़ार गांधी, युवा गांधी , फ़लस्तीनी गांधी. " |
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