BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 15 मार्च, 2005 को 13:57 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
दांडी यात्रा में गाँधी के दो हमशक्ल

महात्मा गाँधी के हमशक्ल
महात्मा गाँधी के हमशक्ल भी दांडी यात्रा में भाग ले रहे हैं
नमक सत्याग्रह के 75 वर्ष पूरे होने पर गुजरात में निकाली जा रही डांडी यात्रा में बापू के दो हमशकलों ने धूम मचा रखी है. उन्हें देखने भीड़ उमड़ती है.

इन दोनों ने अपना जीवन गाँधी को समर्पित कर रखा है.

पूरी दुनिया को एक अदद गाँधी की तलाश है. लेकिन इस डांडी यात्रा में हमारे सामने सहसा एक नहीं बापू के दो-दो प्रतिरूप प्रकट हो गए.

एक हैं आंध्रप्रदेश में गोदावरी जिले के वोका अप्पा राव तो दूसरे हैं अहमदाबाद के प्रकाश भाई मोदी.

 मैं दस साल का था जब बापू आंध्र आए थे, बापू ने मुझे अपने पास बुलाया, पीठ पर स्नेह का हाथ धरा, साथ में बिठाकर खाना खिलाया, तब से मैं बापू का भक्त हूँ. मैं आदिवासी हरिजन और अल्पसंख्यकों के बीच घूम-घूम कर बापू के सिद्धांतों का प्रसार करता हूँ
वोका अप्पा राव

वही भाव-भंगिमा वेश-भूषा और बापू सी चपल-चाल. गोया बापू फिर एक बार अवतरित हो गए हों. 83 वर्षिय वोला हिंदी नहीं जानते, वे तेलगू में ही अपनी बात कहते हैं. उनसे बातचीत के लिए हमें द्विभाषीय के रूप में छत्तीसगढ़ के विधायक कवासी लकमा की मदद लेनी पड़ी.

कुछ पूछा तो वोका अप्पा राव बापू की स्मृतियों में खो गए, "मैं दस साल का था जब बापू आंध्र आए थे, बापू ने मुझे अपने पास बुलाया, पीठ पर स्नेह का हाथ धरा, साथ में बिठाकर खाना खिलाया, तब से मैं बापू का भक्त हूँ. मैं आदिवासी हरिजन और अल्पसंख्यकों के बीच घूम-घूम कर बापू के सिद्धांतों का प्रसार करता हूँ."

डांडी यात्रा में बापू के ये दोनों प्रतिरूप आगे-आगे नेतृत्व करते हुए चलते हैं. चाल इतनी तेज़ कि उनसे बातचीत के लिए हमें भी साथ दौड़ना पड़ा. चेहरे पर चश्मा, हाथ में लाठी, दुबली कठ-काठी. 75 साल के प्रकाश भाई बापू के दूसरे हमशक्ल वोका के लिए कहते हैं, "वो अभी नया है, उसे बापू की रीति-नीति का उतना ज्ञान नहीं है. मैं कड़ाई से बापू के मार्ग का पालन करता हूँ. लेकिन वोका को भी अपने साथ रखता हूँ."

बापू के हमशक्ल

तल्ख़ धूप में भी प्रकाश भाई नंगे पॉव ही डांडी की तरफ बढ़ रहे थे.

प्रकाश भाई को दुख है कि लोग अब गाँधी के नाम पर नाटक ज़्यादा करते हैं. ख़ुद के बारे में प्रकाश भाई कहते हैं -"मैं ड्रामा नहीं करता, बापू के बारे में बापू का प्रचार करता हूँ. यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग मेरी बड़ी इज्जत करते हैं."

यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग इन्हें देखने आते हैं, तस्वीरें खींचते हैं.

बापू के ये हमशक्ल नहीं जानते कि राजनीति तो एक मंडी है, जहाँ सबकुछ बिकता है-बापू का नाम भी और आज नेताओं का नाम नहीं बिकता इसलिए वो चमन बेचते हैं, अमन बेचते हैं- बेचते हैं अपना ज़मीर.

महात्मा गाँधीगाँधी की प्रासंगिकता
दांडी यात्रा के 75 साल होने पर गाँधीवाद की प्रासंगिकता पर बहस हो रही है.
गाँधीजी का नामपत्रनष्ट होती धरोहर
पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में गाँधी स्मारक में रखी धरोहर नष्ट होने के कगार पर है.
गाँधीजी मीराबेन के साथगाँधीजी और मीराबेन
सुधीर कक्कड़ की किताब कहती है कि दोनों के बीच गहरे रिश्ते थे.
महात्मा गाँधीयही है गाँधी का भारत?
क्या गाँधी के सपनों का भारत यही है? विचार व्यक्त करने के लिए क्लिक करें.
इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>