|
बाल धावक के कोच के ख़िलाफ़ मुक़दमा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा में बाल कल्याण विभाग ने लंबी दूर तक दौड़ लगाने वाले तीन वर्षीय बालक बुधिया सिंह के कोच के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. बुधिया सिंह को दुनिया का सबसे छोटा मैराथन धावक माना जाता है और वे पिछले कुछ समय से मीडिया की सुर्खियां बटोर रहे हैं और वे कई उत्पादों के विज्ञापन में भी नज़र आ रहे हैं. बाल कल्याण विभाग की सचिव संयुक्ता मोहंती ने कहा है कि बिरंची दास के ख़िलाफ़ स्थानीय पुलिस से शिकायत की गई है. उन्होंने बताया कि कोच बिरंची दास पर बच्चे के साथ अमानवीय व्यवहार करने और उसका शारीरिक शोषण करने के आरोप लगाए गए हैं. बाल कल्याण विभाग के सदस्य और राज्य के जाने-माने चिकित्सक अरविंद मोहंती ने कहा "अगर उस बच्चे को बिना आराम के इतनी दूर तक लगातार दौड़ाया गया तो उसकी मौत तक हो सकती है." उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमरीका और ब्रिटेन में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मैराथन में दौड़ने पर रोक है लेकिन हाल ही में बुधिया सिंह ने दिल्ली मैराथन में हिस्सा लिया था. मगर बुधिया सिंह के कोच बिरंची दास इस क़ानूनी कार्रवाई से विचलित नहीं दिखते. वे कहते हैं,"मैं केस की परवाह नहीं करता, अगर उनका दिल बुधिया के लिए इतना रो रहा है तो वे जाकर उसकी मां से क्यों नहीं पूछते कि अब उसका जीवन बेहतर है या नहीं." बिरंची दास ने कहा कि बुधिया हमेशा की तरह दौड़ता और अभ्यास करता रहेगा ताकि वह ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाला सबसे कम उम्र का धावक बन सके. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||