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गुरुवार, 03 नवंबर, 2005 को 16:05 GMT तक के समाचार
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'फ़ेयर ऐंड हैंडसम' बनाने वाली क्रीम

गोरेपन की क्रीम विशेष रूप से पुरूषों के लिए
काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं है अपनी चमड़ी की स्याह रंगत के बारे में सब ऐसा सोचते हों.

हालाँकि बहुत बड़ी आबादी गोरी नहीं है लेकिन साँवले और काले लोगों का हीनभावना से ग्रस्त होना आम बात है.

महिलाओं के लिए तो गोरेपन की क्रीम बाज़ार में दशकों से रही है लेकिन पुरूषों के लिए विशेष क्रीम बाज़ार में उतारी गई है, जिसका नाम है--फेयर ऐंड हैंडसम.

इमामी इंडस्ट्रीज़ ने क्रीम को बाज़ार में उतारने से पहले एक सर्वेक्षण कराया था जिसके मुताबिक़ लगभग तीस प्रतिशत पुरूष गोरेपन की क्रीम का इस्तेमाल करने के इच्छुक हैं.

कंपनी के निदेशक मोहन गोयनका कहते हैं, "हमने हैदराबाद में इस उत्पाद को परीक्षण के तौर पर पेश किया और लोगों ने हमारी उम्मीद से बढ़कर उत्साह दिखाया."

वे कहते हैं, "इसमें कोई शक नहीं है कि मर्द अपनी रंगत की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं, पहले हमें लग रहा था मर्द शायद इसे ख़रीदने में झिझकें लेकिन यह हमारा भ्रम ही था."

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मर्दों की एक पत्रिका मैन्स वर्ल्ड के संपादक जेरी पिंटो कहते हैं, "काले मर्द उतने ही परेशान होते हैं जितनी ही महिलाएँ, और गोरा होने का वे उतना ही जतन करते हैं कि जितनी महिलाएँ."

पिंटो कहते हैं, "भारत में टॉल, डार्क ऐंड हैंडसम की बात में किसी का यक़ीन नहीं है, यहाँ तो टॉल, फेयर ऐंड हैंडसम की बात चलती है. अख़बार में शादी के विज्ञापन देखिए कोई मर्द अपने को काला नहीं कहता, वे काले हों भी तो कहते हैं गेहुँआ रंग है."

फेयर ऐंड हैंडसम क्रीम के विज्ञापन में दिखाया जाता है कि एक काला लड़का क्लास में पिछली बेंच पर बैठा है, लड़कियाँ उससे कतराती हैं, लेकिन जब वह क्रीम लगाने लगता है तो उसकी दुनिया ही बदल जाती है.

मुंबई के शॉपिंग सेंटरों में मर्दों को इस क्रीम को ख़रीदते हुए देखा जा सकता है, और ऐसा करते हुए उनमें कोई झिझक नहीं दिखाई देती.

एक बैंक में काम करने वाले भविन पारेख कहते हैं, "मर्दों को अब इस बात में कोई झेंप नहीं महसूस होती कि वे भी गोरे दिखना चाहते हैं."

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