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'अर्थव्यवस्था की विकास दर बढ़ाना संभव' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा कर भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को मौजूदा सात से बढ़ा कर आठ प्रतिशत करना संभव है. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की एक बैठक में कहा, "विकास दर को आठ प्रतिशत से भी आगे ले जाने के लिए अच्छा माहौल है. यह असंभव लक्ष्य नहीं है." मनमोहन सिंह ने कहा कि ऐसा तभी संभव है जब कृषि क्षेत्र में उत्पादन सालाना कम से कम चार प्रतिशत की दर से बढ़े. उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में भारत में कृषि क्षेत्र में औसत डेढ़ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. मनमोहन सिंह ने कहा कि इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों को प्रौद्योगिकी की सहायता लेते हुए अलग-अलग क्षेत्र की समस्याओं के लिए अलग-अलग समाधान पेश करने होंगे. उन्होंने कहा कि सरकार देश के हर ज़िले में कृषि अनुसंधान क्षेत्र स्थापित करने की योजना बना रही है. उल्लेखनीय है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 20 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से आता है. भारत की दो तिहाई आबादी के जीवनयापन का प्रमुख साधन अब भी खेती ही है. मानसून पर आधारित भारतीय कृषि क्षेत्र में जिस साल अच्छी उपज होती है, औद्योगिक उत्पादों की माँग काफ़ी बढ़ जाती है. ऐसे में सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था की विकास दर पर पड़ता है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अमीर और ग़रीब के बीच की खाई बढ़ी'26 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'प्रवासन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ'22 जून, 2005 | पहला पन्ना लौट के हुनरमंद घर को आए01 मई, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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