| मुफ़्ती-सोनिया बैठक में फ़ैसला नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू कश्मीर के मुख़्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बीच बैठक में कांग्रेस के मुख्यमंत्री के बारे में आख़िरी फ़ैसला नहीं हो पाया. बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गठबंधन की शर्तों पर क़ायम हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं से बातचीत के बाद इस पर जल्द ही कोई निर्णय कर लेंगी. बैठक के बाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा. उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि बैठक में स्थिति का जायजा लिया गया है और जल्द ही कोई निर्णय हो जाएगा. जम्मू कश्मीर में सरकार के गठन के समय तय शर्तों के मुताबिक़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को दो नवंबर को मुख्यमंत्री का पद छोड़ देना है और कांग्रेस को अगले तीन सालों के लिए अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करना है. पीडीपी के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने पहले ही पद छोड़ने की स्वीकृति दे दी है और कांग्रेस की ओर से ग़ुलाम नबी आज़ाद का मुख्यमंत्री का पद संभालना तय माना जा रहा है. दोनों ही पार्टियाँ वहाँ गठबंधन सरकार की प्रमुख घटक हैं. फ़ार्मूले के तहत उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को मंत्रिमंडल के कुछ प्रमुख सदस्यों से इस विषय पर चर्चा की थी. उधर कांग्रेस ने अगले तीन साल सत्ता संभालने के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य और शहरी विकास मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद का नाम तय किया है. ग़ुलाम नबी आज़ाद जम्मू कश्मीर के ही नेता हैं और विधानसभा चुनावों के पहले उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर राज्य में भेजा गया था. लेकिन विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत न मिलने के बाद पीडीपी और कांग्रेस ने गठबंधन सरकार बनाई और तीन-तीन साल मुख्यमंत्री बनाने का फ़ार्मूला बनाया गया. पहेल पीडीपी ने मुफ़्ती मोहम्मद सईद को अपना मुख्यमंत्री बनाया था. |
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