| पिता के चुनाव प्रचार में उतरे नौ बेटे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव में प्रत्याशी प्रचार के अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. बिहार के चुनावी दंगल में उतरे नारायण प्रसाद हिसारिया ने भी प्रचार का एक नायाब तरीका अपनाया है. बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार नारायण प्रसाद हिसारिया अपने नौ बेटों के साथ प्रचार में जुट कर इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. इतना ही नहीं, भले ही इनका चुनाव चिन्ह हाथी छाप है, लेकिन अपनी नुक्कड़ सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए ये कई बार बंदरों को भी साथ कर लेते हैं. हिसारिया ने पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में 2,733 वोट हासिल किए थे और इस तरह उनकी ज़मानत जब्त हो गई थी. लेकिन इससे हिसारिया का मनोबल नहीं टूटा और इस बार वे बहुजन समाज पाटीँ के उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. पेशे से गल्ला व्यवसायी नारायण प्रसाद हिसारिया के नौ पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं. इनके चुनाव प्रचार में नौ बेटे हमेशा साथ रहते हैं.
नारायण हिसारिया के बेटे राजेश हिसारिया कहते हैं, "जीतने के बाद उम्मीदवार के घर पर जब जनता काम से जाती है तो नेताजी का दर्शन दुर्लभ हो जाता है. लेकिन हम नौ भाई हैं, जब जनता आएगी तो हमलोग उनके साथ जुड़ कर उनकी समस्यओं के समाधान करने का प्रयास करेंगे." नारायण के एक अन्य बेटे चंद्रप्रकाश न सिर्फ़ अपने पिताजी की जीत सुनिश्चित बताते हैं बल्कि उनकी योजना तो आगामी चुनावों में पिताजी के साथ अपने कुछ भाइयों को भी चुनावी अखाड़े में उतारने की है. नारायण प्रसाद हिसारिया की नुक्कड़ सभाओं में जुटने वाली भीड़ उन्हें वोट देती है या नहीं, यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इनका कुनबा प्रचार के लिए जहाँ-जहाँ जाता है चर्चा का विषय ज़रूर बन जाता है. |
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