|
अफ़ग़ानिस्तान में हत्या के ख़िलाफ़ प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव के एक उम्मीदवार की हत्या के विरोध में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन किया है. राजधानी काबुल और मज़ारे शरीफ़ में भी इस हत्या के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किए गए. 18 सितंबर को हुए संसदीय चुनाव में उम्मीदवार रहे मोहम्मद अशरफ़ रमज़ान की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, उनसे पहले सात अन्य उम्मीदवारों की हत्या हो चुकी है. पिछले सप्ताह मंगलवार को हज़ारा समुदाय के नेता मोहम्मद अशरफ़ रमज़ान मज़ारे शरीफ़ में अपनी गाड़ी में जा रहे थे तभी उन्हें अज्ञात लोगों ने गोली मार दी. प्रदर्शनकारियों ने इस हत्या के लिए स्थानीय अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया है और बल्क़ प्रांत के गवर्नर के इस्तीफ़े की माँग की है. बल्क़ के गर्वनर अता मोहम्मद ने इस मामले में किसी तरह की भूमिका से इनकार किया है. हज़ारा अफ़ग़ानिस्तान की आबादी में हज़ारा समुदाय की संख्या 10 प्रतिशत के क़रीब है. संवाददाता सम्मेलन में हज़ारा समुदाय के नेता मोहम्मद मोहक़िक ने कहा, "मैं अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से पूछना चाहता हूँ, कहाँ है सुरक्षा जिसका वादा किया गया था, मैं राष्ट्रपति करज़ई से पूछना चाहता हूँ कि इंसाफ़ कहाँ है?" मज़ारे शरीफ़ में रमज़ान की हत्या का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों ने लगातार दूसरे दिन सड़क जाम रखा और काबुल जाने वाले रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया. अधिकारियों ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन में कोई हिंसा नहीं हुई और कुछ घंटे बाद सड़क पर यातायात दोबारा शुरू हो गया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय का एक प्रतिनिधिमंडल रमज़ान की हत्या की जाँच करने के लिए काबुल से मज़ारे शरीफ़ पहुँच रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में वोटों की गिनती का काम जारी है, चुनाव अधिकारियों ने घोषणा की है कि अगर विजयी उम्मीदवार की मौत हो जाती है तो दूसरे नंबर पर आने वाले उम्मीदवार को विजेता मान लिया जाएगा. इस नियम पर कई अधिकारियों ने चिंता प्रकट की है, उनका कहना है कि यह भी हिंसा की एक वजह हो सकती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||