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खुराना पुराना हो गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 16 सितंबर से चेन्नई में शुरू हो रही है और ठीक इसके पहले मदनलाल खुराना के निष्कासन और वापसी का प्रकरण समाप्त हुआ है. सभी की निगाहें इस पर लगी हैं कि क्या खुराना प्रकरण और अनुशासनहीनता को लेकर पार्टी के किसी मंच पर चर्चा होगी. पत्रकार इस सवाल पर भाजपा के हर नेता को कुरेद रहे हैं. लेकिन इस पर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है. जब इस प्रकरण को निपटाने में अहम भूमिका निभानेवाले भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वैंकया नायडू को घेरने की कोशिश की गई तो उन्होंने शायराना अंदाज़ में कहा, खुराना तो पुराना हो गया. और इतना कह कर वो आगे बढ़ गए. उनका आशय था कि यह मुद्दा अब पुराना पड़ गया है. यारी काम आई गाँव और मुहल्ले की वह दोस्ती जिसमें साथ-साथ पतंगबाज़ी की हो, कंचे खेले हों और लट्टू चलाएं हो, उसके क्या कहने. ऐसे लंगोटिया यार की तो बात ही कुछ और है. ऐसे दोस्त आड़े वक्त में बहुत काम आते हैं. मैं बात कर रहा हूँ, वैंकया नायडू और उनके दोस्त श्यामसुंदर रेड्डी की. दोनों आंध्र प्रदेश के नेल्लूर ज़िले के एक कस्बे से ताल्लुक रखते हैं. रेड्डी तमिलनाडु आ गए और होटल व्यवसाय में लग गए. वैंकया आंध्र में राजनीति करने लगे. लेकिन जब भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आयोजित करने की ज़िम्मेदारी वैंकया पर आ पड़ी तो उन्हें रेड्डी की याद आई और उन्होंने भी पूरा साथ दिया. अब भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक श्यामसुंदर रेड्डी के सवेरा होटल में आयोजित की जा रही है. तमिलनाडु में हिंदी कुछ समय पहले तक भाजपा विशुद्ध हिंदी पट्टी की पार्टी मानी जाती थी लेकिन अब उसने कर्नाटक और आंध्र जैसे दक्षिण के राज्यों में पैर पसार लिए हैं. लेकिन तमिलनाडु जैसे राज्य में उसकी उपस्थित अब भी नगण्य जैसी है. वैसे तो चेन्नई बड़े-बड़े होर्डिंग का शहर है लेकिन या तो वे तमिल में हैं या फिर अँग्रेज़ी में. हिंदी का नामोनिशान नहीं है. और हों भी क्यों, यह राज्य तो हिंदीविरोधी आंदोलन का केंद्र रहा है. लेकिन भाजपा के हिंदी के कुछ बैनर इसमें अलग नज़र आते हैं. और एक हिंदीभाषी के लिए सुखद आश्चर्य का एहसास कराते हैं, भले ही उनमें भाषा की ढेरों अशुद्धियाँ क्यों न हों. |
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