| 'अपहृत ब्रितानी की लाश' की डीएनए जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक वर्ष पहले असम में अगवा किए गए भारतीय मूल के ब्रितानी व्यापारी की तलाश के सिलसिले में पुलिस अब जंगल से मिले मानव अवशेषों का डीएनए परीक्षण कराने जा रही है. उत्तरी लंदन में रहने वाले प्रतुल देव नाम के 67 वर्षीय व्यक्ति का पिछले वर्ष मार्च महीने में अपहरण कर लिया गया था. पुलिस को जेल में बंद दो लोगों से जंगल में पड़े मानव कंकालों का पता चला था. प्रतुल देव के परिवार के सदस्यों ने लगभग दस लाख रूपए की फिरौती भी दी थी लेकिन उनकी रिहाई नहीं हुई. पुलिस को असम मिजोरम की सीमा पर स्थित हवाईथांग जंगल में सात घंटे की तलाश के बाद दो कंकाल मिले, दूसरी लाश प्रतुल देव के सहयोगी साधन देव की मानी जा रही है जिनका प्रतुल के साथ ही अपहरण कर लिया गया था. केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबाआई की एक टीम भी प्रतुल देव के लापता होने की जाँच पिछले तीन महीनों से दक्षिणी असम में कर रही है. प्रतुल देव के परिवार के सदस्यों, ख़ास तौर पर उनकी बेटी ने अपने पिता की रिहाई के लिए काफ़ी सक्रिय अभियान चलाया था. पुलिस का कहना है कि अरूणाचल प्रदेश के चकमा जनजाति से जुड़े कुछ लोगों ने इस मामले में शामिल होने की बात स्वीकार की है. कुछ स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इस अपहरण का संबंध स्थानीय राजनीति और व्यापार की प्रतिद्वंद्विता से है न कि विद्रोहियों का काम है. वर्ष 2001 में प्रतुल देव भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में असम से चुनाव लड़े थे. इसके अलावा वे स्थानीय पेपर मिलों को बाँस की सप्लाई का भी काम करते थे जिसमें काफ़ी प्रतिस्पर्धा है. सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा, "पूर्वोत्तर भारत के विद्रोही आम तौर पर फिरौती की रकम मिल जाने के बाद बंधक को छोड़ देते हैं. हमें लगता है कि फिरौती के लिए अपहरण का नहीं बल्कि और जटिल मामला है." प्रतुल देव की बेटी शिप्रा देव अपने पिता के अपहरण के बाद ब्रितानी पुलिस अधिकारियों के साथ भारत आईं थीं और उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल से मुलाक़ात की थी. पुलिस का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि जंगल में मिले कंकाल प्रतुल देव और साधन देव के हैं या नहीं. |
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