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बांग्लादेश सरकार को राहत, फ़ैसले पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 1975 में सैनिक तख़्ता पलट को ग़ैर क़ानूनी कहने के हाई कोर्ट के फ़ैसले पर दो महीने के लिए रोक लगा दी है. हाई कोर्ट ने संविधान के पाँचवें संशोधन को ग़लत ठहराया था जिसके तहत पूर्व राष्ट्रपति ज़िया-उर-रहमान के अधीन सैनिक शासन को वैधानिक ठहराया गया था. सैनिक विद्रोह के बाद ज़िया-उर-रहमान ने सत्ता संभाली थी. इस बग़ावत में देश के पहले शासक शेख़ मुजीबुर रहमान मारे गए थे. हाई कोर्ट के फ़ैसले से बांग्लादेश की मौजूदा सरकार शर्मिंदा हुई है क्योंकि इस समय सरकार की कमान ख़ालिदा ज़िया के पास है जो ज़िया-उर-रहमान की विधवा हैं. जबकि विपक्ष की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना शेख़ मुजीबुर रहमान की बेटी हैं. सोमवार को एक खाली पड़ी संपत्ति पर विवाद के मामले में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह फ़ैसला सुनाया था. अख़बार डेली स्टार के मुताबिक़ हाई कोर्ट के फ़ैसले के तुरंत बाद ही क़ानून मंत्री मोउदूद अहमद ने इसे 'बेमतलब' का फ़ैसला बताया और कहा कि इससे सिर्फ़ इतना होगा कि कुछ समय के लिए सनसनी फैल जाएगी. ज़िया-उर-रहमान के कारण ही संविधान में पाँचवाँ संशोधन लागू किया गया था जिसके तहत 1975 से 1979 तक के सैनिक शासन को वैधानिक ठहराया गया था. पाँचवाँ संशोधन बांग्लादेश के संविधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी के तहत देश में बहुदलीय लोकतंत्र के लिए रास्ता साफ़ हुआ था. 1975 के सैनिक विद्रोह के कारण शेख़ मुजीबुर रहमान की आवामी लीग की सरकार गिर गई थी. विद्रोह के दौरान शेख़ मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के ज़्यादातर सदस्य भी मारे गए थे. |
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