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तीर्थ यात्रियों को टीके लगवाने की सलाह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बौद्ध धर्मावलंबियों के एक प्रमुख तीर्थ-स्थल कुशीनगर निर्वाण मंदिर में शाम की प्रार्थना के बाद बगल के थाई मंदिर का घंटा प्रार्थना समाप्त होने की सूचना दे रहा है. यहीं मेरी मुलाकात श्रीलंका से आये एक बौद्ध दल से होती है. इस दल के नेता पियाल जयतिलक को जब मैंने बताया कि कुशीनगर जापानी इंसेफलाइटिस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित है तो वह हतप्रभ रह गए. जयतिलक का कहना है कि जब वह वीज़ा लेने गये थे उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नही दी गयी थी. जयतिलक का कहना है कि जापानी इंसेफलाइटिस दिमागी बुखार की वीमारी श्रीलंका में भी होती है, और लोग मच्छरों से बचाव के उपाय करते हैं. वेन भिक्खु बौद्धध्यांग गौतम ने बताया कि इस समय बरसात के मौसम में मुख्य रूप से श्रीलंका, थाइलैंड और चीन के पर्यटक आये हुए हैं. लेकिन अक्टूबर से बड़ी तादाद में पर्यटकों का आना शुरू होगा, इसलिए उन्हें अभी से इस बारे में सूचना दे देनी चाहिए. जापान का उदाहरण एक होटल में मेरी मुलाकात एक जापानी युवा पर्यटक से हुई. किसी जमाने में जापान इंसेफलाइटिस की बीमारी से ग्रस्त था, लेकिन जापान ने व्यापक टीकाकरण और जागरूकता फैलाकर बीमारी को काबू कर लिया. इसलिए जब मैंने इस जापानी युवक से इंसेफलाइटिस के बारे में पूछा तो उसका कहना था ‘मैंने इसके बारे में पहले कुछ सुना ही नहीं.’ और पूछने पर इस जापानी युवक ने अपनी बाई बांह खोलकर टीके के निशान दिखाये. उसने मुझे बताया कि जापान में सभी बच्चों को जरूरी टीके बचपन में ही लगाये जाते हैं. जापानियों ने अब पुराने टीके पर प्रतिवंध लगा दिया है और साल भर में वे एक नया टीका वनाने जा रहे हैं. सीमावर्ती नेपाल इलाके में इस समय जापानी इंसेफलाइटिस फैली हुई है. कुशीनगर में 54 और महाराजगंज में 78 बच्चों की मौतें हो चुकी हैं. इनके अलावा देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, खलीलाबाद, संत कबीर नगर, बलरामपुर, गोंडा और आज़मगढ़ में भी मौतें हुई हैं. यहां पास में सौनौली बार्डर से सालाना 45 हजार विदेशी पर्यटक आते-जाते है. कुशीनगर बौद्ध तीर्थ स्थल में सालाना 1,10,000 हजार भारतीय और 13 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक आते हैं. कुशीनगर के अलावा श्रावस्ती, कपिलवस्तु और लुम्बिनी बौद्ध तीर्थ स्थल इसी क्षेत्र में है. पर्यटकों को टीके गोरखपुर मेडिकल कालेज में इंसेफलाइटिस के विशेषज्ञ प्रो. केपी कुशवाहा का कहना है कि जिन विदेशी पर्यटकों को यहां दो हफ्ते से अधिक रहना है. उन्हें टीका लगवाकर आना चाहिए. प्रो. कुशबाहा का कहना है कि एक बार दो बार काटने से इससे संक्रमण नही होता. एसजीपीजीआई लखनऊ में माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर टीएन. ढोले का कहना है कि इंसेफलाइटिस की सूचना देना कानूनन अनिवार्य किया जाये. विदेशी पर्यटकों के लिए जो गाइड लाइन उपलब्ध है उनमें इंसेफलाइटिस प्रभावित इलाकों में जाने पर वैक्सीन लगाने की सलाह दी जाती है. लेकिन पर्यटक इस सलाह पर तभी अमल करेंगे, जब उन्हें मालूम हो कि जिस इलाके में जा रहे हैं वहां वह महामारी है. |
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