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मंगलवार, 30 अगस्त, 2005 को 12:40 GMT तक के समाचार
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तहज़ीब के ज़रिए दोस्ती का पैग़ाम

प्रदर्शनी
दिल्ली में हुई प्रदर्शनी में पाकिस्तान के कई डिज़ाइनर और मॉडल अपनी कला के साथ पहुँचे
भारत और पाकिस्तान में सबसे बड़ी समानता क्या है? आप कहेंगे संस्कृति और तहज़ीब.

लेकिन नहीं, एक चीज़ और समान है दोनों देशों में जिसका नाम है बाज़ार.

तो फिर क्यों नहीं तहज़ीब और बाज़ार की इस समानता को साथ लेकर दोस्ती की एक नई इमारत तैयार की जाए.

ऐसी ही एक कोशिश शुरू की है भारत और पाकिस्तान के डिज़ाइनरों और मॉडलों ने जो पिछले दिनों दिल्ली में एक छत के तले जमा हुए.

दिल्ली में दोनों देशों के कुछ डिज़ाइनर और मॉडल एक प्रदर्शनी में जुटे जिसमें विवाह के समय पहने जानेवाले कपड़ों की नुमाइश लगी.

जश्ने नज़ारत

 जब दोनों मुल्क़ आपस में दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं तो हमने भी इन प्रदर्शनियों के ज़रिए दोनों मुल्कों के कलाकारों को एक मंच पर लाने का काम शुरू किया
मुकेश शर्मा, आयोजक

यह अचानक नहीं हुआ कि एशियाई फैशन उद्योग को हिंदुस्तानी विवाह समारोह में बाज़ार की बड़ी संभावनाएं दिखाई देने लगीं.

करीब 25 सालों से ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ आयोजित करते रहे आईटीई समूह के प्रमुख मुकेश शर्मा ने सन् 2000 में ब्राइड एंड ग्रूम की थीम पर प्रदर्शनियाँ आयोजित करनी शुरू कीं.

पिछले पांच साल से वह लगातार ऐसी प्रदर्शनियां कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लंदन में प्रदर्शनियाँ आयोजित की हैं.

वर्ष 2003 में जहाँ उन्होंने 'जश्ने दोस्ती' का आयोजन किया था वहीं 2004 में 'जश्ने अमन' का आयोजन किया.

इस प्रदर्शनी को जश्ने नज़ारत का नाम दिया.

मुकेश शर्मा का कहना है,"जब दोनों मुल्क़ आपस में दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं तो हमने भी इन प्रदर्शनियों के ज़रिए दोनों मुल्कों के कलाकारों को एक मंच पर लाने का काम शुरू किया."

अनुभव

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निरमा जहांगीर कहती हैं कि पाकिस्तान में भी प्रतिभाएँ हैं जिनको सामने लाया जाना चाहिए

पिछले 20 साल से पाकिस्तान में डिज़ाइन का काम करती आ रही फ़रीदा क़ुरैशी को लगता है कि दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान और भी आसान बनाया जाना चाहिए.

एक अन्य पाकिस्तानी डिजाइनर कंवल का कहना है कि पाकिस्तान में अब फैशन डिज़ाइनरों को यह समझना पड़ रहा है कि वे केवल हिंदुस्तानी डिज़ाइनरों की नक़ल करके बाजार में नहीं टिक सकते.

पाकिस्तानी फ़िल्म अभिनेत्री निरमा जहांगीर कहती हैं,"पाकिस्तान में तो मनीष मल्होत्रा से भी अच्छे डिजाइनर हैं, उनमें जबरदस्त रचनात्मकता है, बस जरूरत उन्हें आगे लाने की है."

भारतीय फिल्मों और केबल टीवी के लिए दरवाजे पाकिस्तान ने भले ही अब तक नहीं खोले हों, लेकिन कलाकारों की आवाजाही हुई है, जिससे कंवल जैसे पाकिस्तानी डिज़ाइनर बड़ी खुशी महसूस करते हैं.

अब योजना है कि जल्दी ही कराची में इस थीम पर प्रदर्शनी कराई जाए और महज़ कपड़े ही नहीं बल्कि गहनों की भी प्रदर्शनी लगाई जाए.

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