|
केन और बेतवा नदियों को जोड़ा जाएगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने केन और बेतवा नदियों को आपस में जोड़ने के लिए एक समझौता किया है. वैसे तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार देश की सभी नदियों को आपस में जोड़ा जाना है लेकिन अभी इसकी योजना ही बनाई जा रही है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के इस समझौते को इसी प्रक्रिया की शुरुआत के रुप में भी देखा जा सकता है. हालाँकि देश के पर्यावरणविदों के बीच इस बात को लेकर गंभीर मतभेद हैं कि नदियों को आपस में जोड़ा जाना व्यावहारिक निर्णय है या नहीं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा,'' उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश अच्छे पड़ोसियों की भाँति विभिन्न क्षेत्रों में बहुत पहले से सहयोग करते आ रहे हैं और इस योजना से दोनों राज्य लाभान्वित होंगे.'' दूसरी ओर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा, '' इस परियोजना से किसी को शिकायत नहीं होगी और इसमें पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा गया है.'' योजना समझौते के अनुसार उत्तर प्रदेश के झाँसी ज़िले में बहने वाली केन नदी को मध्यप्रदेश के भोजपुर में बहने वाली बेतवा नदी से जोड़ा जाना है. केन और बेतवा दोनों राज्यों की जीवन रेखाओं की तरह है. केन नदी का 85 प्रतिशत कैचमेंट एरिया मध्यप्रदेश में है. परियोजना के अनुसार केन नदी का पानी बेतवा में भेजा जाएगा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उपस्थिति में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने गुरुवार को एक समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किए. यह केंद्र और दोनों राज्यों के बीच त्रिपक्षीय समझौता है. इस समझौते के बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कहा कि नदियों को जोड़ने की पाँच लाख 60 हज़ार करोड़ रुपए की परियोजना में जिन 30 बिंदुओं पर नदियों को जोड़ने की योजना है, केन और बेतवा उनमें से एक है. सरकार ने कहा है कि 4000 करोड़ की इस परियोजना के विवरण बाद में दिए जाएँगे. बाबूलाल गौर दिल्ली से राजस्थान के लिए रवाना हुए हैं उन्होंने कहा है कि वे वहाँ पारबती-काली और सिंध-चंबल जोड़ने की परियोजना को अंतिम रुप देंगे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||