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प्रतिबंधित संगठन जमातुल मुजाहिदीन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जमातुल मुजाहिदीन 1996 में वजूद में आया और यह कोई बहुत जाना-पहचाना संगठन नहीं है. अलबत्ता यह बांग्लादेश के उत्तरी क्षेत्र में ज़्यादा सक्रिय रहा है और इसी साल फ़रवरी से इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है. जमातुल मुजाहिदीन की मुख्य माँग है कि बांग्लादेश में इस्लामी शासन लागू किया जाए हालाँकि बांग्लादेश पहले से ही एक मुस्लिम बहुल देश है. जमातुल मुजाहिदीन मुख्य रूप से बांग्ला भाषाई और सांस्कृतिक धारा के ख़िलाफ़ है क्योंकि इसका कहना है कि यह धारा देश में इस्लामी शासन लाने में बाधक है. आरोप लगाए गए हैं कि जमातुल मुजाहिदीन ख़ासतौर से जात्रा को निशाना बनाता है जो बांग्लादेश की एक लोकप्रिय सांस्कृतिक विधा है. हमले इसी साल जनवरी में भी जात्रा पर दो बार हमले हुए और आरोप लगाया गया था कि वे हमले जमातुल मुजाहिदीन ने ही किए थे. आठ जनवरी को हुए हमले में 15 लोग घायल हुए थे और जमातुल मुजाहिदीन के छह संदिग्ध सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें इस संगठन के आध्यात्मिक नेता कहा जाने वाले डॉक्टर असदुल्लाह अल ग़लीब भी थे. डॉक्टर अल ग़लीब अरबी भाषा के प्रोफ़ेसर हैं जो अब भी जेल में हैं. उसके बाद 15 जनवरी को भी एक जात्रा को निशाना बनाया गया और उसका भी आरोप जमातुल मुजाहिदीन पर ही लगाया गया था. उस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 40 से ज़्यादा घायल हुए थे. इस्लामी शासन जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश में इस्लामी शासन स्थापित करना चाहता है और आज के बम धमाकों के स्थानों से भी जो पर्चे मिले हैं उनमें भी यही माँग की गई है. इसके अलावा पर्चों में चेतावनी दी गई है कि "बुश और ब्लेयर को चेतावनी दी जाती है कि वे मुस्लिम देशों से बाहर निकल जाएँ और मुस्लिम देशों में शासन करने के तुम्हारे दिन ख़त्म हो गए हैं." जमातुल मुजाहिदीन पर इस साल फ़रवरी से ही प्रतिबंध लगा दिया गया था और कुछ संवाददाताओं ने इस पर भी संदेह व्यक्त किए हैं कि क्या उसके पास इतनी बड़ी क्षमता है कि वह इतने बड़े पैमाने पर बम धमाकों की योजना को अंजाम दे सकता है. |
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