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अमीरी उबाऊ चीज़ है-बाबा आम्टे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रसिद्ध समाज सेवी बाबा आमटे यह मानते हैं कि अमीरी एक उबाऊ चीज़ है और लगातार अमीर होते युवा एक दिन नई राह ढूंढ़ेंगे. वे यह भी मानते हैं कि आगे आने वाले दिनों में युवाओं को सक्रिए राजनीति में हिस्सा लेना ही होगा, विधायक की राजनीति के बिना कोई भी राजनीति बांझ है. विभिन्न मुद्दों पर युवाओं के जो दवाब समूह तैयार हो रहे हैं उसे लेकर वे बेहद आशान्वित दिखाई देते हैं. नब्बे साल के हो चुके बाबा आम्टे मानते हैं कि नर्मदा की लड़ाई में आंदोलन की हार हो गई है. उल्लेखनीय है कि 90 के दशक में बाबा आमटे ने नर्मदा आंदोलन के समर्थन में आनंद वन छोड़ कर नर्मदा के किनारे अपना डेरा बसा लिया था. बाबा आमटे ने कहा, "आज भारत में विभिन्न मुद्दों पर युवाओं के इतने प्रेशर ग्रूप यानी दबाव समूह आगे आ रहे हैं कि मैं इस देश के भविष्य के बारे में बहुत आशावादी हूँ." "अमीरी उबाऊ है और इसी से मुझे आशा है कि हमारे लगातार अमीर होते युवा नई राह ढूढेंगे. दुनिया के सारे अमीर देशों में यही हुआ है." बाबा ने कहा, "सिर्फ़ भारत ही नहीं मैं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को लेकर भी बहुत आशावादी हूँ. मुझे आशा है बहुत जल्द ही दोनों मुल्कों के बीच सीमाएँ समाप्त हो जाएँगी लोग एक दूसरे से मुक्त व्यापार कर सकेंगे." उन्होंने कहा, "जर्मनी में भी बहुत दुश्मनी थी और वह दीवार एक रात में टूट गई. यहाँ भी कुछ ऐसा ही होगा क्योंकि दोनों देशों की जनता अब समझ गई है कि मित्रता ही उनके हित में है. हमारे देश का पानी पाकिस्तान के बासमती को उगाता है जिसे वे सारी दुनिया में बेचते हैं. तो यह कैसे दो देश हुए?" शुगरकेन का हैंडपम्प बाबा आमटे ने कहा हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. लेकिन हमें यह सोचना चाहिए कि हमारे युवा हिंसा का रास्ता क्यों अपना रहे हैं. जब तक इस देश में आर्थिक विषमता बढ़ेगी हिंसा और बढ़ेगी. लेकिन बंदूक का जवाब बंदूक से नहीं दिया जा सकता. जब देश का युवा बंदूक का सहारा ले तो समझना चाहिए कि वह विफलता से हताश है. वे याद करते हैं, "मैंने भी बंदूक उठाई थी पर जल्द ही राजगुरू का साथ छोड़कर गाँधी से मिलने गया. तब गाँधी ने मुझे ताड़ के पेड़ से रस निकालने की विधि सिखाई." वे कहते हैं, "मैं हतप्रभ था, मैंनै गाँधी से कहा जिस हाथ में बंदूक थी उसमें आप ताड़ी दे रहे हैं यह मुझे कैसे भा सकता है? गाँधी ने कहा मैं तुम्हें शुगरकेन का हैंडपम्प दे रहा हूँ. इसे हर गाँव में हर घर में लगा दो. यही भारत को बदल देगा." बाबा आम्टे कहते हैं कि गाँधी ने जो कहा था वही हुआ. आज शुगर लॉबी ही महाराष्ट्र की राजनीति चलाता है. गाँधी की प्रासंगिकता बाबा आमटे ने कहा कि गाँधी आज के युग में और अधिक प्रासंगिक हैं. गाँधी प्रगतिशील थे और मुझे पूरा विश्वास है कि गाँधी आधुनिक तकनीक का उपयोग देश की स्थिति को सुधारने में करते. गाँधीवादी बनने के लिए सिर्फ़ चक्की चलाने की ज़रूरत नहीं है. पर महत्वपूर्ण बात यह है कि विज्ञान की मिलकियत ग्राम पंचायत के पास होना चाहिए. वे कहते हैं, "मेरी नज़र में गाँधी एक पॉप सिंगर की तरह थे. एक पॉप सिंगर की तरह उन्होंने जनता के साथ नाता जोड़ा, जनता झुमती थी उनके साथ." "उनकी छाती के एक हिस्से में वेदना थी और दूसरे में विश्वास. आज हमारे पास सॉफ्टवेयर तो है पर हमें उसमें हार्डवेयर को जोड़ने की ज़रूरत है." बाबा आम्टे कहते हैं कि वे मार्क्स को जीसस से भी बड़ा संत मानते हैं. लेकिन विज्ञान ने मार्क्स को भी उलटा टाँग दिया है. चीन अमेरिका के रास्ते चल रहा है और पश्चिम बंगाल भी. वे कहते हैं, "हमें विज्ञान की मदद लेनी ही होगी." बाबा ने कहा कि 26 जनवरी 1930 को नेहरू ने सूर्योदय के समय रावी नदी के तट पर स्वातंत्र्य की घोषणा की थी. मेरी अंतिम इच्छा है कि पाकिस्तान में उसी रावी के किनारे किसी सूर्यास्त पर मेरा भी सूर्यास्त हो जाए. |
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