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सोमवार, 18 जुलाई, 2005 को 14:13 GMT तक के समाचार
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सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के फ़ैसले से असहमति

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ताजमहल को देखने के लिए हर साल हज़ारों पर्यटक भारत पहुँचते हैं
उत्तरप्रदेश के मुस्लिम वक़्फ़ विभाग के मंत्री शाकिर अली का कहना है कि वह ताजमहल को अपनी संपत्ति बताने के सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के फ़ैसले से सहमत नहीं हैं.

बीबीसी से एक विशेष बातचीत में शाकिर अली ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को ताज जैसी विश्व धरोहर के संरक्षण की काबिलियत नहीं है.

शाकिर अली ने कहा, "मुस्लिम वक़्फ़ विकास का मंत्री होने नाते मैं जानता हूँ कि वक़्फ़ की जायदाद किस तरह से बर्बाद हो रही है."

उन्होंने कहा, “बोर्ड एक तरफ अपनी जायदाद की हिफाजत नहीं कर पा रहा है. बोर्ड अपनी जायदाद को ख़ुर्द बुर्द करने से रोक नहीं सकता है. इनकम नहीं बढ़ा पा रहा है, ताकि आम मुसलमानों की उससे भलाई की जा सके."

शाकिर अली ने कहा, "दूसरे वो ताज जैसी चीज़ पर जो दुनिया की चीज़ है. दुनिया के हर नागरिक के लिए दर्शनीय है उस पर फैसला दे दिया. यह न्यायोचित नहीं है. मैं ताज के वक़्फ़ बोर्ड में लिए जाने से सहमत नहीं हूँ."

'पैसे पर नज़र'

एक सवाल के जवाब में शाकिर अली ने कहा कि “सुन्नी बक़्फ़ बोर्ड न तो ताजमहल की हिफाज़त कर सकता है, न संरक्षण कर सकता है और न देखभाल कर सकता है, सिर्फ़ बोर्ड को यह दिखाई देता है कि वहाँ पैसे ज़्यादा हैं.

 वक़्फ़ क़ानून 1995 के तहत सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को वक़्फ़ की संपत्तियाँ चिन्हित करने का अधिकार है. लेकिन यह इतना गंभीर मसला है इसमें न सिर्फ़ हमसे, बल्कि प्रदेश के मुखिया से भी राय लेनी चाहिए थी. बिना राय लिए, बिना सोचे समझे, सस्ती लोकप्रियता के लिए ये बवाल खड़ा कर देना न्यायसंगत नहीं है, न देश के लिए, न पर्यटन के लिए और न देश की सुरक्षा के लिए.
शाकिर अली

शाकिर अली ने कहा कि वह बोर्ड के चेयरमैन हाफ़िज उसमान की इस राय से भी सहमत नहीं हैं कि ताजमहल से मिलने वाली सात प्रतिशत धनराशि से मुसलमानों के कल्याण के कार्य हो सकेंगे. उन्होंने सलाह दी कि “बोर्ड पहले अपनी बाकी जायदाद को बचा ले. इसको बचा लेगा, आय बढ़ा लेगा तो मुसलमान की हालात सुधर जाएंगे.”

उन्होंने कहा, “वक़्फ़ क़ानून 1995 के तहत सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को वक़्फ़ की संपत्तियाँ चिन्हित करने का अधिकार है. लेकिन यह इतना गंभीर मसला है इसमें न सिर्फ़ हमसे, बल्कि प्रदेश के मुखिया से भी राय लेनी चाहिए थी. बिना राय लिए, बिना सोचे समझे, सस्ती लोकप्रियता के लिए ये बवाल खड़ा कर देना न्यायसंगत नहीं है, न देश के लिए, न पर्यटन के लिए और न देश की सुरक्षा के लिए.”

शाकिर अली का कहना है कि बोर्ड के इस फैसले से मुसलमान बदनाम हुआ है.

शाकिर अली के अलावा पर्यटन मंत्री हमीद ने भी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के फैसले से असहमति जताई है.

बोर्ड के चेयरमैन हाफ़िज उसमान सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के सदस्य हैं. फिलहाल केवल नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खाँ उनके फैसले के पक्षधर दिखते हैं, लेकिन वह भी पहले जैसे मुखर नहीं हैं.

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