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'ताजमहल वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने ताजमहल को अपनी संपत्ति के रुप में दर्ज करने के आदेश दिए हैं. सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन हाफ़िज़ उस्मान का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सारी क़ब्रों पर सुन्नी वक्फ़ बोर्ड का हक़ है और इसी के तहत बोर्ड ताजमहल को भी अपनी संपत्ति मान रहा है. उनकी दलील है कि ताजमहल भी मुमताज महल की क़ब्र है. हाफ़िज़ उस्मान का कहना है कि वक्फ़ अधिनियम 1995 के तहत उत्तर प्रदेश की सारी क़ब्रों पर वक़्फ़ बोर्ड का अधिकार घोषित किया गया था. हाफ़िज़ उस्मान ने अपने फ़ैसले में कहा,''विभिन्न तर्कों के आधार पर मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि रौज़ा ताजमहल, इससे संबंधित मस्जिद और जमातखाना तथा दीगर मक़बरे आदि जो पुख्ता चहारदीवारी से घिरे हुए हैं वक्फ़ संपत्ति हैं तथा वक्फ़ अधिनियम 1995 के प्रावधानों के अनुसार इसका पंजीकरण वक्फ़ संपत्ति के रूप में किया जाना अनिवार्य है.'' उनकी दलील है कि इसी अधिनियम के आधार पर ताजमहल, इससे जुड़ी मस्जिद, जमातख़ाना और अन्य मक़बरे वक्फ़ की संपत्ति हैं. इसी अधिनियम के तहत बोर्ड के सभी अभिलेखों में ताजमहल को उसकी संपत्ति के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया गया है. हाफ़िज़ उस्मान कहना है कि इस बारे में आगे चर्चा के लिए भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ एक बैठक की जाएगी. वक्फ़ बोर्ड ने यह आदेश इरफ़ान बेदार नामक एक शख्स की याचिका पर दिया है जो ख़ुद ताजमहल के मुतवल्ली या मैनेजर बनना चाहते हैं. ताजमहल को सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति घोषित करने और ख़ुद को वहाँ का मैनेजर नियुक्त करने की गुज़ारिश करते हुए इरफ़ान बेदार ने 1998 में बोर्ड के सामने एक याचिका दायर की थी. इस याचिका पर लंबे समय तक सुनवाई न होने पर इरफ़ान बेदार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया. उच्च न्यायालय ने नवंबर,2004 में सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को निर्देश दिए कि वह इस संबंध में फ़ैसला ले. न्यायालय के इस निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने आदेश दिया कि ताजमहल को वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति दर्ज किया जाए. |
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