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अयोध्या से आँखों देखा हाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विवादित बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि परिसर के पीछे की ओर एक सड़क जाती है. इसे वेद मंदिर रोड कहा जाता है. पूरा परिसर लोहे की मोटी छड़ों से घिरा हुआ है. इसी रोड पर रामजन्मभूमि पुलिस थाना है और सीआरपीएफ़ का कैंप है. यहीं पर चरमपंथियों ने अपनी जीप खड़ी की और जैसा कि पुलिस का अनुमान है रिमोट कंट्रोल से इसमें विस्फोट किया. इस विस्फोट से सुरक्षा दीवार में एक छेद बन गया और इसी से चरमपंथी अंदर की ओर घुसे. उनकी दिशा से लगता है कि वे विवादित स्थल की ओर जाना चाहते थे जहाँ बाबरी मस्जिद थी और अब जहाँ राम की मूर्ति स्थापित कर दी गई है. जब मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि एक लाश जीप के पास पड़ी हुई थी और वहाँ खून बिखरा पड़ा था. दो-दो लाशे दो अलग जगहों पर थीं और एक लाश कुछ दूरी पर और थी. इस तरह कुल मिलाकर छह लाशें विवादित परिसर में पड़ी हुई थीं. उनके पास थैला था और अटैची थी. थैलों में हथगोले दिखाई दे रहे हैं. पुलिस वालों ने बताया कि उनके पास से पिस्तौल भी था. सुरक्षाकर्मियों ने दिखाया कि उनके पास रॉकेट लॉंचर भी था जिससे एक बार उन्होंने गोला भी दागा लेकिन वह निशाने पर नहीं लगा. सुनियोजित मैं तक़रीबन बीस सालों से वहाँ जाता रहा हूँ और जो परिस्थितियाँ मैंने देखीं उससे लगता है कि यह बहुत सुनियोजित हमला था.
हमलावर इस परिसर के नक्शे से अच्छी तरह वाकिफ़ थे और साफ़ दिखता है कि कार्रवाई में थोड़ी भी देर होती तो बहुत कुछ घट सकता था. मुझे बताया गया कि हमले और जवाबी कार्रवाई में एक महिला घायल हुई हैं और सीआरपीएफ़ के जवानों सहित चार सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं. अयोध्या का यह परिसर हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मावलंबियों के लिए श्रद्धा का स्थान है. मैंने देखा कि हमले के कई घंटे बाद भी दोनों धर्मों के लोग अपने घरों की छतों पर खड़े थे. दोनों ही धर्मों के लोगों ने कहा कि जो कुछ भी हुआ है वह अच्छा नहीं है और इसकी निंदा की है. |
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