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गोस्वामी को अग्रिम ज़मानत नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पटना की एक विशेष अदालत ने पूर्व ज़िलाधीश और बाढ़ घोटाले के अभियुक्त गौतम गोस्वामी को ज़मानत देने से इंकार कर दिया है. गौतम गोस्वामी के वकील ने कहा है कि अब वे अग्रिम ज़मानत के लिए पटना हाईकोर्ट में जाएँगे. उल्लेखनीय है कि गौतम गोस्वामी को पुलिस तलाश रही है और प्रशासन ने उन पर एक लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा है. पटना के ज़िलाधीश रहे गौतम गोस्वामी पर आरोप है कि वे बाढ़ राहत की 18 करोड़ की राशि के हुए घोटाले में शामिल थे. यह राशि बिहार स्माल स्केल इंडस्ट्रीज़ को दिए जाने की जगह बाबा सत्यसाईं इंडस्ट्रीज़ को दे दी गई थी और इसमें से बड़ी राशि का कोई हिसाब किताब नहीं मिल रहा है. इस मामले में मुख्य अभियुक्त और बाबा सत्यसाईं इंडस्ट्रीज़ के संचालक संतोष झा पहले ही विशेष अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. सुबूत सोमवार को सतर्कता विभाग की विशेष अदालत में गौतम गोस्वामी की ज़मानत याचिका पर सुनवाई हुई. बचाव पक्ष के वकील का कहना था कि तत्कालीन ज़िलाधीश गौतम गोस्वामी ने जो भी निर्णय लिए वो मुख्य सचिव सहित कई बड़े अधिकारियों की जानकारी में थे और यदि ज़मानत दे दी जाती है तो वे सारे तथ्य सामने रखने को तैयार हैं. लेकिन सरकारी वकील ने कहा कि नोडल अधिकारी की तरह गौतम गोस्वामी ने जो कुछ किया उसे प्रधान महालेखाकार ने भी ग़लत ठहराया है और उनसे पूछताछ आवश्यक है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष अदालत ने कहा है कि प्रथमदृष्टया गौतम गोस्वामी दोषी दिखाई देते हैं इसलिए उनकी ज़मानत याचिका रद्द की जाती है. अब तक संतोष झा सहित छह अभियुक्तों को हिरासत में लिया जा चुका है. |
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