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बाढ़ घोटाले के मामले में वारंट जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में बाढ़ राहत राशि वितरण में 11 करोड़ रूपए के घोटाले के सिलसिले में पटना के पूर्व ज़िलाधिकारी गौतम गोस्वामी समेत आठ लोगों के ख़िलाफ़ स्थानीय अदालत ने ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किए हैं. बिहार पुलिस प्रशासन ने अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के प्रयास तेज़ कर दिए हैं जिसके तहत सभी हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर चौकसी बरती जा रही है. सोमवार को निगरानी विभाग ने पटना की एक विशेष अदालत में अभियुक्तों को गिरफ़्तार किए जाने के लिए विधिवत आवेदन किया जिसके बाद मंगलवार को औपचारिक वारंट जारी कर दिया गया. गौतम गोस्वामी के अलावा दो अन्य प्रमुख अभियुक्त हैं, उनके सहकर्मी अमिताभ अरूण और ठेकेदार संतोष झा. लखनऊ में गौतम गोस्वामी के वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल अदालत से ज़मानत लेने का प्रयास कर रहे हैं. निगरानी विभाग ने तीनों अभियुक्तों के बारे में सूचना देने के लिए इनाम की भी घोषणा की है. पटना से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि इनाम की रकम के बारे में कुछ नहीं बताया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार ये राशि दो लाख रूपए है. घोटाला बिहार में बाढ़ राहत घोटाले की ख़बर पिछले दिनों सुर्खियों में रही. दरअसल पिछले वर्ष बाढ़ राहत के लिए 17 करोड़ रूपए का आवंटन हुआ. मगर इसमें से 11 करोड़ रूपए का कोई अता-पता नहीं है. ठेकेदार संतोष झा की जिस फ़र्ज़ी कंपनी को राशि वितरित गई उसका नाम बिहार सरकार के एक विभाग से मिलता है. इस कंपनी का नाम है बिहार सत्य साईं इंडस्ट्रीज़ यानी बीएसएसआई, जिसे आम तौर पर वहाँ बिहार स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज़ का छोटा नाम समझा जाता है. गौतम गोस्वामी पिछले वर्ष बाढ़ के समय पटना के ज़िलाधिकारी थे और बाढ़ राहत कार्यक्रम में योगदान के लिए उनका नाम प्रतिष्ठित पत्रिका 'टाइम' में शामिल किया गया था. लेकिन बाद में गौतम गोस्वामी ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया और लखनऊ में सहारा इंडिया नामक निजी कंपनी में एक उच्चाधिकारी के पद पर काम करने लगे. |
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