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शुक्रवार, 03 जून, 2005 को 13:12 GMT तक के समाचार
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प्रेरणा केंद्र में मायावती की प्रतिमा

मायावती
मायावती ने दलित चेतना का केंद्र स्थापित किया है
दलितों के वर्चस्ववाली बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक 'प्रेरणा केंद्र' का लोकार्पण किया है जिसमें अन्य लोगों के साथ उनकी भी प्रतिमा स्थापित है.

भारत में शायद यह पहला मौक़ा है जिसमें राजनीतिक नेताओं ने अपने जीते-जी अपना स्मारक बनाकर प्रतिमाएँ स्थापित की हों.

मायावती ने बहुजन समाज प्रेरणा केंद्र के लोकार्पण के लिए 3 जून का दिन इसलिए चुना क्योंकि दस साल पहले इसी दिन मायावती पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं.

बीएसपी का कहना है कि यह स्मारक बहुजन समाज के संघर्षों की याद को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है.

बीएसपी की एक पुस्तिका में कहा गया है कि यह स्मारक बहुजन समाज के संघर्षों की याद को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है.

यह स्मारक 2450 वर्गमीटर क्षेत्रफल के एक भूखंड पर बना है. विशाल हाल बाहर से 105 फुट और अंदर से 75 फुट ऊँचा है.

इमारत के वास्तुकार रामसुतार हैं और इसमें बुद्धकालीन स्थापत्य कला अपनायी गई है.

इसमें दलित चेतना के प्रतीक डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कांशीराम और मायावती को आशीर्वाद देने की मुद्रा में खड़े हैं.

दूसरी ओर अन्य चार दलित महापुरुष नारायण गुरु, ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज और पेरियार की प्रतिमाएँ हैं.

मायावती ने अपने भाषण में खुलासा किया कि दिल्ली के सरदार पटेल मार्ग पर भी एक ऐसा ही स्मारक बनाया जाएगा.

कांशीराम ने वसीयत की है कि उनकी मृत्यु के बाद अस्थियाँ नदियों में प्रवाहित न करके लखनऊ और दिल्ली के स्मारकों में रखी जाएँ.

प्रतीक

मायावती ने दलित चेतना के प्रतीक इस प्रेरणा केंद्र को ऐसे नाज़ुक समय पर स्थापित किया है जबकि बीएसपी हफ़्ते बाद लखनऊ में ब्राह्नण सम्मेलन करने जा रही हैं.

 उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार अस्थिर है और कभी भी विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके लिए पार्टी को तैयार रहना चाहिए.
मायावती

अपनी स्थापना के शुरूआती दौर में बीएसपी नेता इन वर्गों के लोगों को सदियों से शोषण के लिए कोसते थे.

लेकिन अब एक एडवोकेट सतीश मिश्र को पार्टी का महासचिव बनाया गया है और पोस्टरों में मायावती के साथ उनके चित्र हैं.

मायावती ने अपने भाषण में समझाया कि अगर सवर्ण जातियों के लोग पार्टी के उम्मीदवार बनेंगे तो वे कांग्रेस, बीजेपी और अन्य ब्राह्मणवादियों के वोट काटेंगे.

मायावती का कहना था कि उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार अस्थिर है और कभी भी विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इसके लिए पार्टी को तैयार रहना चाहिए.

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